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संतो भाई समय बड़ा हरजाई #1(राम लछमन )

आपको एक नग्मा पेश करने जा रहा हूँ .उसके पहले संस्कृत अनुष्टुप छंद ,और इक दोहरा पेश करूँगा. नग्मा (भजन )सूरदास का  मशहूर भजन “नाथ कैसे गजको बंध छुडायो ” ईस  ढंगसे गाया जा सकेगा .

छंद —प्लवन्ते पस्तारा नीरे , मानव :घन्नंती  राक्षसं , कपय :कर्म कुर्वन्ति कालस्य कुटिला गति :

दोहरा —-समय समय बलवान है नहीं पुरुष बलवान ,काबे लूँ टी  गोपिका येहि अर्जुन येहि बान

भजन–संतो भाई समय बड़ा हरजाई समयसे कोंन बड़ा मेरे भाई संतो भाई समय बड़ा हरजाई ….1

राम अरु लछमन बन बन भटके संगमे जानकी माई ,कांचन मृगके पीछे दोड़े सीता हरन कराइ …….संतो भाई  2

सुवर्ण मयी लंका रावनकी जाको समंदर खाई ,दस मस्तक बीस भुजा कटाई इजज़त ख़ाक मिलाई ….संतो भाई 3

राजा युधिष्ठिर द्युत क्रीड़ामें हारे अपने भाई, राज्यासन धन सम्पति हारे द्रोपदि वस्त्र हराई …………..संतोभाई  4

योगेश्वरने गोपिगनको भावसे दिनी विदाई , बावजूद अर्जुन था रक्षक बनमे गोपी लूँटाई ……………..संतोभाई  5

जलारामकी परीक्षा करने प्रभु आये वरदायी ,साधूजनकि सेवा करने पत्नी दिनी विरबाई ………….संतोभाई 6

आज़ादिके लिए बापूने अहिंसक लड़त चलाई ऐसे बापुके सिनेपर हिंसाने गोली चलाई …………….संतोभाई 7

देशींगा दरबार नवरंगसे गदा निराश न जाई ,समा पल्टा जब उस नवरंग्का  बस्तीसे भिक मंगाई …संतो भाई 8

सुन्नी सद्दाम हुसेनको समयने गद्दी दिलाई कुर्द शियाको मार दिए जब ,समयने फ़ांसी दिलाई …संतोभाई   9

विक्रमके दादाकी  तनखा माहकी बारा रुपाई ,विक्रम खुदकी एक मिनिटकि बढ़ कर बारा रुपाई …संतोभाई  10

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દેશીંગાનો ઈતિહાસ- ૪ ; ચાંદખાં અને ગલાલબુ

दरबारे गामना  चोकीदार  तरीके  एक सोराठियो  रबारी  अने एक  सिपाई जातनो मुसलमान ऍम  बे  चोकिदारो  राख्या  एमने पगार  तरीके रोकड़ा पैसाना  बदले जमीन आपवानु   नक्की  करेलुं अने एक पोलिस पटेल तरीके  ब्राह्मण राखेलो.  अने   वहीवटदार  तरीके पण  ब्राह्मण  राखेलो  चोकियात  माटे  “पसायतो ” शब्द वपरातो .पोलिसपटेल ने पगार तरीके पैसा आपवामाँ  आवता .पोलिसपटेल ए मुख्य दरबार जे तालुकदार  तरीके ओळ खातो ए बांटवाना बारेय गामनो  वड़ो  गणातो  .एनी बारेय गामो ऊपर अमुक प्रकारनी  सत्ता  चालती .पोलिस पटेल तालुकदारनो  पण नोकर गणातो .मने खबर छे .त्यारनी वात करूं तो पसायता  तरीके 1 का ना बापा रबारी अने 2 चांदखां बापा   सिपाई हता .    मुसलमानोमा  खान अथवा खां शब्द  पठाणो ना   नामनी पाछल   लागतो पण जेना वडवाओ  मुसलमान    राज्यकर्ताओ ना  वखतमाँ   लश्करी  सिपाईओ  हता  .तेओंना नामनी पाछल पण खां  शब्द  लगाड़े छे. एवीज  रीते इडर बाजुना ठाकरडा ओ   के जेओना वड्वाओ ए जुना वखतमाँ  इस्लाम धर्म अंगीकार कर्यो छे .तेओ पण पोताना  नाम पाछल खां शब्द लगाड़े  छे .एवी रीते  जयपुर  बाजुना  इस्लाम धर्म पालता  राजपूतो  के जे कायमखानी  मुसलमान तरीके ओळखाय छे .तेओना  नाम पाछळ  पण खां  शब्द लागे  छे .आ आपने थोड़ी बीजी  जाणवा  जेवी वात करी .

पसायता  चाँदखां  बापाना  मोटाभाई बोदेखां गाम माँ  पसायता नी  नोकरी करता त्यारे चाँद खां  बापा सरदारगढ़  पटेल खेडुतने  त्यां  साथी  हता .    पटेलनी कुंवारी  जुवान दिकरी  गलाल  बपोरे भात लैने चाँदखां ने जमाड वा  जाय .  चाँद खां  कुंवारो  गलाल जेवड़ी उमरनो  हतो .गलालना  बापने चाँदखां  उपर  बहु विश्वास  हतो .पण एक कहेवत  आ प्रसंगे  कहूं  छुं .

” विद्या,वनिता ,द्रूम लता ,यह   नहीं  चिने  जात ,
जोरहे  नित उसके संगमें ताहिमे लिपटात.

ए  रीते   चाँद खां  अने  गलाल   वच्चे  प्रेम थई गयो . अने पछी  सरदारगढ़ ना  बाबी दरबारे चाँदखां अने  गलालना निकाह पढावी  आप्या .गलाले इस्लाम धर्म स्विकार्यो .नामतो एज राख्युं पण पाछल बू शब्द लाग्यो . चाँद खां गलालबू  लडिने  लई  देशींगा  आवयो .चाँद खां न मोटाभाई बोदेखाँ  गाममाँ  लग्न प्रसंगे  ढोल  वगाड वानु  काम करता जातना माणसनी  दिकरी लाडू  साथे लगन कर्याँ  पछी  लाडू लाडूबू   थई गई   आने देशींगा माँ   सुयाणी तरीके  सेवा आपवा लागी  तेने संतानमाँ एक दिकरी  थएली  जे कुतियाणाना  सिपाई जिवाणखां  वेरे परणे ली  तेने  एक दिकरो  हबीब खां उर्फ़े अबू  उरफे अबुड़ो  हतो . जे  देशिंगा  एनी नानी  लाडूबू  पासेज रहेतो ते बहु सरल स्वभावनो   हतो .तेने शिकार करता में जोयो नथी ते भेंसो चरावतो .तेने  दादिबू   नामे बीबी हती .तेने कोई संतान  थेलु  नहीं  दादिबू दरबार ना नोकरो हता  तेओ साथे  ते बहु हळी मळीने रहेती .आम जोवा  जावतो  ए गामना दरेक जुवानिया  साथे हळी मळी ने रहेती .चाँद खां ने गालाल बूथी संतानमाँ बे दिकरा अने एक दिकरी थैली दिकरी ने वनथली ना  कसाई साथे लगन करेला .दिकरो इभरामखां ना लगन   मेघवालना तुरिनी  दिकरी   साथे   थएलां  आने बीजा दिकरा रहेमानखां  उरफे सिदी ना लगन इस्लाम धर्म अंगिकार करेला मेघवाल  कुटुंबनी    दिकरी  साथे  थएलां  . बाबी दरबार नवरंगखां के ऐना बाप कोई मोर के कबूतरने   मारता  नहीं.ज्यारे सिदिए   गाममाँ  एक एक मोर,ने  ढेल ने मारी  नाखेला  .गाममाँ  चारण आई तरफ के घंटेश्वर  तरफ  दरबारो  अने ऐना नोकरो कोई पशु पंखीनो  शिकार करता नहीं दरबार मुजफ्फर खां बहु भला माणस हता .तेओना  बन्ने पग  भांगेला हता .एटले तेओ डेलीमाँ   बेसी रहेता .अने तेओने कंपनी आपवा मयूर अने मालदेना  दादाना  दादा भोजा बापा बापुनी सनमुख ओटा  ऊपर कायम बेसी रहेता मोटा दरबार ना  प्रथमना बीबी जन्नत नशीनशीन न

मिर्ज़ा ग़ालिबकी ग़ज़ल

हज़ारों खवाहिशे ऐसीकी  हर   खवाहिशपे  दम  निकले

बहुत निकले मेरे  अरमान लेकिन फिरभी कम निकले ………1

निकलना  खुल्दसे आदमका  सुनते  आये है लेकिन

बहुत  बे आबरू होकर तेरे कुचेसे  हम निकले ……………..2

मुहब्बतमे नहीं  है फर्क जीने ओर मरनेका

उसीको  देख कर जीते है जिस काफिरपे दम निकले …..3

खुदाके वासते पर्दा न काबेसे उठा  वाइज़

कहीं  ऐसा न हो वहांभी  वही काफिर सनम निकले ……4

कहाँ मयखानेका  दरवाज़ा ग़ालिब ओर कहाँ वाइज़

पर इतना  जानते है कल  वो आताथा  कि  हम निकले …5

1

मेरे मय परस्त अह्बाबके लिए

मराजावु जब मै  यारो मातम नहीं मनाना
उठाके जनाज़ा  मेरा नग्मा सुनाते जाना .रखना …….१
लाके लहदमे  मुजको  उल्फत के  साथ  रखना
इत्तरके       बदले मुंह पर आबे अंगूर  छिड़कना ……..२
तुर्बत पे मेरी आना  शमा नहीं जलाना
दोस्ताना  गर है दोस्तों बोतल  शराब लाना …………….३
“आता “को याद करना से   मदरासे जाम भरना
सागर  बदल बदल कर पि लेना और पिलाना …………..4

કવિ દલપતરામનો છપ્પો

કવિ દલપતરામનો છપ્પો  કવિ દલપતરામે છપ્પા બનાવ્યા હોય એવું યાદ નથી .કવિ શામળદાસ છપ્પા તરીકે જાણીતા ,હું છપ્પો આપની આગળ રજુ કરું છું તે એક  અપવાદ ગણાય .પણ  છપ્પો  કોયડા જેવો છે .આ છપ્પામાં  કવિએ પ્રશ્ન અને ઉત્તર બેય આવી જાય છે .એવી રચના કરી છે.
શ્રીફળમાં શું હોય   દગો કરતાં શું હારે             એક જવાબ તમને તમને સહેલું રહે એમાંટે   આપું છું . શ્રીફળમાં શું હોય કે કોપરું
અધિક ગામડા માય  લહે કોણ પદવી ભારે
મટે નહિ તે કોણ પરમ સુખ સૌ થી શું છે
દાટી આદ્ય ને અંત  તહાં જે નામ રહ્યું છે
વાચા અવિચલ એ દેવ છે  રાખી રેમ  નજર  રહે
દન દન પદ આદિ વરણ  પર મધ્ય વરણ કવિ જન કહે
હવે આનો સાચો જવાબ આપવા આપ સહુને હું વિનતી કરું છું.જો આપી શકો. તો આતા તરફથી શાબાશી, અને નો આપી શકો તો બે દિવસ પછી હું જવાબ આપી દઈશ  રાજી ?

उर्दू गीत

उर्दू गीत
ये गीत  राजकपूर गाता है “मै दुनियामे  हरदम रोताही रहा हूँ ” इस कदर  गाया जा सकता है .
बुतखानेमे जाताहू बुतपरस्त नहीं  हूँ ,बुतपरस्त नहीं हूँ बुत शिकानभी नहीं  हूँ.
बुत शिकन को साथ कभी देता नहीं हूँ .बुतखाने में जाताहूँ बुतपरस्त नहीं हूँ १
चर्चो में जाता हूँ इसाई नहीं हूँ ईसाई नहीं हु इसुको मानताभी हूँ
दलील बाज़िमें  कभी उतराताभी नहीं हूँ……..बुत २
मसाजिदमें जाताहू मुसलमान नहीं हूँ .मुसलमान नहीं हूँ  बे ईमान नहीं हूँ
शेख नाकहेतो मसाजिदमे  जाता  नहीं हूँ ……बुत ३
अगियारीमें  जाने नहीं देते है गबरू  नहीं जाने देते गबरू वर्ना ज़रूर जाता हूँ
अगर जाता तो आतिषका साजिद होता हूँ …….बुत ४
आदाब करता  सबका किसी एकका नहीं हूँ  किसी एकका नहीं हूँ बरखिलाफ नहीं हूँ
मै दर्देदिल इंसान हूँ दरिंदा नहीं हूँ ………….बुत ५
मैं “अताई”   हूँ कोई अल्लामा  नहीं हूँ अल्लामा नहीं हूँ  ईल्म चाहता भी हूँ
मूत अल्लिम हूँ कोई मु अल्लिम  नहीं  हूँ…….बुत ६
बुतखाना =मंदिर
बुतपरस्त =मूर्तिपूजक
बुत शिकन =मूर्तितोडनेवाला
मसाजिद =मस्जिदों ,मस्जिद्का बहु वचन
अगियारी =पारासिओंका मंदर
गबरू = पारसी
आतिश =अग्नि
साजिद = प्रणाम करने वाला
आदाब =आदर
बरखिलाफ = विरोधी
दर्देदिल =जिसके ह्रदय में दया हो
दरिंदा =हिंसक पशु ,सिंह,बाघ ,चिताह वैगेरह
अल्लामा = श्रेष्ठ विद्वान्
ईल्म = विद्या
मूतअल्लिम =विद्यार्थी
मुअल्लिम = शिक्षक .मास्तर

સમય બડા હરજાઇ

प्लवन्ते पास्तारा निरे मानव घ्नानान्ति राक्सासन

कपय: कर्म कुर्वन्ति कालस्य  कुटिला गति: મતલબકે  સમય ની ગતિ બહુ વિચિત્ર હોય છે  પાણા કોઈદી પાણીમાં  તરે પણ સમય એવો હતો .રામને લંકામાં જવું હતું ત્યારે પાણા પાણી ઉપર તર્યા અને  પૂલ બનીગયો . અને માણસો  કોઈદી રાક્ષાસને  મારી શકે ?અને એપણ     રામના સમયમાં શક્ય બન્યું .અને વાંદરા  કોઈદી કામ કરે  અને એપણ  રામના સમયમાં વાંદરાઓએ પુલ બાંધી આપ્યો. એટલેકે સમયની ગતિ બહુ વિચિત્ર હોય છે .समय समय बलवान है नहीं पुरुष बलवान

काबे लुंटी गोपिका  येही अर्जुन येही बान   અર્જુન એજ હતો એનું ગાંડીવ ધનુષ એનું એજ હતું .કે જેને લીધે મહાભારતના યુધ્ધમાં હા હા કાર મચી ગએલો.. પણ સમય એ નહતો .એટલેજ સામાન્ય  લુંટારાઓએ   અર્જુનના રક્ષાણ નીચે રહેલી ગોપીઓને લુંટી લીધી .

હું એક ગીત આપની સમક્ષ રજુ કરું છું’ જેમાં સમયે કેવી હલ ચલ  મચાવી દીધી.  એ વાત આવશે .આ ભજન અનેક ઢબથી ગઈ શકાશે .જેનો રાગ ભૈરવી દીપચંદી છે. भक्त कवी सुरदासका भजन }  नाथ कैसे गजको बांध छुडायो . इसी  ढंग
राम अरु लछमन बन बन भटके संगमे जानकी माई
कंचन मृगके पीछे दोड़े सीता हरण कराइ ———–संतोभाई १
सुवर्ण मई लंका रावनकी जाको समंदरहारे अपने भाई  खाई
दस मस्तक बीस भुजा कटाई इज्ज़त ख़ाक मिलाई   —-संतोभाई २
राजा युध्धिष्ठिर द्युत  क्रिदामे  हारे अपने भाई
राज्यासन धन सम्पति हारे द्रोपदी वस्त्र हराई————संतो भाई ३
योगेश्वरने  गोपिगन को भावसे दिनी विदाई
बावजूद अर्जुन था रक्षक बनमे गोपी लुन्टाई ————संतोभाई ४
जलारामकी परीक्षा करने प्रभु आये वरदाई
साधू जानकी  सेवा करने पत्नी दिनी वीरबाई ———–संतोभाई ५
आजादिके लिए बापूने अहिंसक लड़त चलाई
ऐसे बापुके सीने पर हिन्साने  गोली चलाई ———-संतोभाई ६
देशिंगा दरबार नोरंगसे गदा निराश नाजाई
समा पलटा जब उस नोवरंगका बस्तीसे भिक मंगाई –संतोभाई ७
पानी भरकर बरतन सरपर दोड्की हुई हरिफाई
जवां लड़कियाँ पीछे रहगई भानु पहली आई ———-संतोभाई ८
अब वो भानु चल नहीं सकती निर्बल होती जाई
अपने हाथो खा नहीं सकती कोई खिलावेतो खाई —–संतो भाई ९
दो हज़ार साल अगस्त्की जब दूसरी तारीख आई
इस फानी दुनियाको छोडके भानुने लीनी विदाई ——-संतोभाई १०
विक्रमके दादाकी तनखा माहकी बारा रुपाई
विक्रम खुदकी एक मिनिटकी बढ़कर बारा रुपाई —–संतोभाई ११
नंगेपेर बकरियां चराई कोलेज  डिग्री पाई
कोलगेटने बड़ा बॉस बनाके नई नई शोध करवाई —–संतोभाई १२
एक गुजराती सपुतने श्रीजीसे माया लगाईं
श्रीजी आकेबिराजे  ह्रदयमें मंदिर कई बन जाई ——-संतोभाई १३
गोर्धनभाई पोपटने सिंहको मार गिराई
अब गोर्धनभाई निर्बल होगए मख्खी न मारी जाई —–संतोभाई १४
प्याज्का जब बुरा ज़माना लोक मुफ्त ले जाई
वोही  प्याज अब महँगी होगई गरिबसे खाई न जाई —-संतोभाई १५
घरमे बैठ लिखता पढ़ता यार्दमें करता सफाई
सुरेशाजानिने  कला परखकर जग मशहूर कराई ——=संतोभाई १६
हिल मिल कर रहो जगतमे इच्छो सबकी भलाई
मोततो एक दिन आने वाला क्यों रहो सुखदाई ———-संतोभाई १७
बेर बबुल्की जाड़ीके बिच सोनेवाला अताई
वोही अताई अमरीका आया देखो कैसी जमाई ———संतो भाई १८

नुकतेचिं

नुकतेचिं કોઈ માણસ પ્રસિદ્ધ ગાનારો હોય, અવાજ સારો હોય,ભજનો ગાતોહોય .   એ જે બોલતો હોય એ બધુંજ  સાચું હોય એવું માનવું ભૂલ ભરેલું હોય શકે માટે પરમેશ્વરે આપણને  બુદ્ધિ આપી છે .એનો ઉપયોગ કરી ,વિચાર કરવાથી સત્ય સમજાય જશે .

એક ભજનિક ભજન ગાતા પેલા ખાસ કરીને તો કબીર સાહેબનું ભજન . પહેલા દોહરો ગાય છે કે –

कबीरा हम जब पैदा हुवे लोक हँसे हम रोए

હવે આપ વિચાર કરો મૃત્યુ  પામેલો માણસ હસી શકે ખરો ? જો એ હસતો હોય તો એ મૃત્યુ પામેલો નહોય .બરાબર છે ?

ऐसी करनी कर चलू हम हँसे जग रोए

ખરો દોહરો આવો છે .

जब तुम आये जगतमे लोक हँसे तुम रोय
ऐसी करनी कर चलो तुम पीछे सब रोय                                                                                                                                                ऐसी करनी कर चलू हम हँसे जग रोए

अल्लामा

क्या आप सच्चाई जाननेकी ख्वाहिश रखते हैं ?

तो जानो

हिन्दोस्तांमे तकरीबन हजरत इसासे  ६०० साल पहले साबकिन  नामका  एक अल्लामा – फिलसूफ  हो गया था ।  उसने वैदिक तह्ज़ीबके खिलाफ बगावत की ।   उसने ऐलान किया कि  वेद उपनिषद , पुराण, रामायण, महाभारत और सब शास्त्रों यकिन  करनेके काबिल नहीं है कि,

  • बहिश्त और जहन्नुम नहीं है।
  • सवाब और अजाब नहीं है ।

साबकिन गोश्त खाया करते थे, और उन्होंने  साबित किया कि, गोश्त इन्सानोंका खुराक नहीं है, लेकिन आदमकी ज़हन  ये साबित करे कि, बगैर गोश्त खाए इन्सान अपनी   दानाई खो बैठेगा।  तो गोश्त कहना मुनासब है ?

अल्लामाका सहायफ़ यह कहता है की जब इन्सान मरता है, तब उसका वजूद  ख़त्म हो जाता है और उसका नजात हो जाता है। उसके जिस्मसे   कोई शै  निकल कर ज़िन्द: नहीं रहती।  इन्सान एक गैरफानी रूह नहीं रखता  अल्लामाका एक संस्कृत  कलाम-

यावद जीवेत सुखं जीवेत,  नास्ति मृत्युरगोचर:
भस्मीभूतस्य देहस्य पूनरागामानम  कुत:?
(જ્યાં સુધીજીવો આનંદ , લહેરથી જીવો જલસા કરીને જીવો.
મૃત્યુ ચોક્કસ આવવાનું છે અને
એટલુંજ  ચોક્કસ એ છે કે,
મર્યા પછી  પાછુ જીવિત થવાનું નથી )

અઘરા શબ્દોના અર્થ 

હઝરત ઈસા= શ્રીમાન ઇસુખ્રીસ્ત

તકરીબન =આશરે ,લગભગ

તહજીબ =સંસ્કૃતિ

ખિલાફ = વિરોધ

બગાવત =બળવો

ઐલાન =પડકાર

બહીસ્ત =સ્વર્ગ

જહાન્નુંમ =નરક

સવાબ=પુણ્ય

અઝાબ =પાપ
સાબકીન=પહેલાના સમય નાં લોકો

ગોશ્ત =માંસ

ઝહન = બુદ્ધિ

દાનાઈ =આવડત ,ચતુરાઈ

મુનાસબ=વ્યાજબી

સહાયફ=પુસ્તક

વજૂદ =અસ્તિત્વ

નજાત =મુક્તિ

જિસ્મ =શરીર

શૈ=વસ્તુ

    ગૈરફાની =જેનો કદી નાશ નથાય એવું , અમર

રૂહ = આત્મા

કલામ = કવિતાની કડી, વાક્ય

शायरी- ई- अताई

હું એક ગઝલ લખીશ એમાં મખ્ખન શબ્દ બંધ બેસતો કેવાય પણ મેં ગ્રીસ શબ્દ વાપર્યો છે એ એટલા માટે કે,  નેતાની પત્ની  એને ચુંબન કરે તો વખતે માખણ  ચાટી જાય પણ જો ગ્રીસ હોય તો કોઈ  ચાટી નોશકે અને નેતાને વધુ નરમ રાખે વળી જરાક રમુજ થાય છતાં તમે મને માર્ગ દર્શન આપીને આભારી કરી શકો છો
तो अब सुनो
सूफी ओलिया मंसूरकी
गजल जैसी
अताई की मशवरा गजल
अगर है शोक कुर्सी का तो हरदम  ग्रीस लगता जा
पकड़ कर पाँव नेताका चरण उनका  तू चूमता जा |
चिंता मत कर गरीबो की फिकर कर अपने वालो की
बिठाकर उनको कुर्सी पर मोज उनको कराता जा |
बहुमति डाल खड्डे में वहीँ  उनको तू रहने दे
लघुमति को चड़ा सरपर हिफाजत  उनकी करता जा |
गिला मत सुन गरीबो की  प्रूफ बन जा तू निंदा से
करे कोई हाय हाय तेरी हांसी उनकी उडाता  जा |
मशवरा है “अताई” की बराबर गोरसे सुन ले
करके कौभान्ड तरकीबसे जेब अपनी तू भरता जा |
जेब भर जाय जब पूरी स्विस बेंक में जमा कर दे
पीरी में गर जरुरत है उठा कर खर्च कराता जा |
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ना अहल है वो अहले  सियासत की नज़र में

वादेसे  कभी जिसको मुकरना नहीं आता |