કેટલાંક જાણવા જેવાં વાક્યો .

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પહેલાના સમયમાં  મહંતો  ,ગુરુઓ  શિષ્ય બનાવતાં  પહેલાં તેમની પરીક્ષા લેતા હતા  . એક ચેલો મૂંડાવવા આવનારને મહંતે  પ્રશ્ન કર્યો   .
पान सड़े घोडा अड़े  विद्या विसरि जाय 
तव पर रोटी जले  कहो चेला  क्यों थाय
હાજરજવાબી  ચેલે એકજ ટૂંકા વાક્યમાં જવાબ આપી દીધો  . આ ચેલો થવા આવનાર  સોરઠના  ઘેડ વિસ્તારનો હતો   . “ફેરવ્યા વિના ” મહંત બોલ્યો  .  बेटा मैं सुरति प्रवीनकांत   शास्त्री  जैसा होशियार नहीँ हूं   मुझे   विगतसे  समझाओ  . ચેલો બોલ્યો બાપુ  જે નાગરવેલના પાન  જે પાનની  દુકાનવાળા  વેચવા માટે રાખતા હોય  એ લોકો  પાનને પાણી ભરેલા  કુંડામાં  રાખતા હોય છે  .  અને એને ઘડી ઘડી  ફેરવતા રહેતા હોય છે   . જો પાનને ફેરવે નહીં તો પાન સડીજાય   . અને ઘોડાને બાંધીજ રાખો  .  અને એને    થોડી વાર પછી  ફેરવવા ન લઈ   જાઓ તો એ ઘોડો  અટકતો અટકતો  ચાલે   . અને વિદ્યાને  દરરોજ યાદ ન કરો તો  ભુલાય જવાય   .અને તાવડીમાં રોટલો મુક્યો હોય  એને જો તમે ફેરવો નહિ તો  તે બળી  જાય   , ચેલો મૂંડાવા આવેલ માણસના જવાબથી  મહંત ખુશ થયો   . અને  મહન્તે ચેલો મુન્ડી નાખ્યો  . અને પછી મહન્ત  બોલ્યો  बेटा अब तू   “आतावानी ” वाला  आता के पास जा और उसके पाससे  थोड़ी जादूगिरी  सिख ले  फिर हम लोग  लोगोको  उल्लू बनाके माला माल  हो जाएंगे  . એક દિવસ  એક ઘર વિહોણી  વૃધ્ધા થોડા દિવસ  રહેવા માટે આવી  ચેલે મહંતને ખબર આપીકે  એક નિરાધાર ડોશીમા  થોડા દિવસ માટે  આપણા આશ્રમમાં  રહેવા માગે છે  .  મહંત બોલ્યો  बीटा हमारी पास जगह  कहाँ है   . वो रूममे  देव देवताओंकी  मूर्तियां  है  ए रूममे   पुजाका सामान   पडाहै    और दूरवाली जो रुम है   उसमे मेरी पथारी है  बोल उस बुढ़ियाको कहाँ  रख्खेंगे  हमारी पास फालतू जगह  कहाँ है   .   થોડી વાર પછી  ચેલે ખબર આપ્યાકેaapya કે એક બિચારી 18 વરસની  માંઝરી  આંખો વાળી ખુબ સુરત  નિરાધાર   યુવતી  બે રાત રહેવા માટે  આવવા માંગતી હતી પણ  આપણા પાસે જગ્યા નથી એટલે મેં એને ના પાડી    મહંત કહે  जा जा  बुला ला जगह हो जाएगी ऐ  ? जो देवताओंकी  मुर्तिया है  उसको  गाँव  के मन्दिरमे  रख देंगे  . और  दूसरा सामान है उसको  इधर उधर  कहींभी  रख देंगे  .   ચેલો બોલ્યો  પણ આપણા પાસે  વધારાની પથારીમા ક્યાં છે   ?  મહંત કહે   अरे बे वक़ूफ़  वोतो मेरी साथ मेरी  पथारी   सो रहेगी

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17 responses to “કેટલાંક જાણવા જેવાં વાક્યો .

  1. pragnaju ઓગસ્ટ 7, 2016 પર 2:15 પી એમ(pm)

    8 को लिखो 8 बार; उत्तर आए 1000, बताओ कैसे?

    …………………………………….
    888
    88
    8
    8
    +8
    ________
    1000
    टमाटर मटर – टर लगा तीसरा सब्जी बताओ ?
    कटर (कटहल का मालवी नाम)
    …………………………..
    तीन विकल्प
    बहुत समय पहले की बात है , किसी गाँव में एक किसान रहता था. उस किसान की एक बहुत ही सुन्दर बेटी थी. दुर्भाग्यवश, गाँव के जमींदार से उसने बहुत सारा धन उधार लिया हुआ था. जमीनदार बूढा और कुरूप था.

    किसान की सुंदर बेटी को देखकर उसने सोचा क्यूँ न कर्जे के बदले किसान के सामने उसकी बेटी से विवाह का प्रस्ताव रखा जाये.

    जमींदार किसान के पास गया और उसने कहा – तुम अपनी बेटी का विवाह मेरे साथ कर दो, बदले में मैं तुम्हारा सारा कर्ज माफ़ कर दूंगा . जमींदार की बात सुन कर किसान और किसान की बेटी के होश उड़ गए.

    तब जमींदार ने कहा –चलो गाँव की पंचायत के पास चलते हैं और जो निर्णय वे लेंगे उसे हम दोनों को ही मानना होगा.वो सब मिल कर पंचायत के पास गए और उन्हें सब कह सुनाया.

    उनकी बात सुन कर पंचायत ने थोडा सोच विचार किया और कहा- ये मामला बड़ा उलझा हुआ है अतः हम इसका फैसला किस्मत पर छोड़ते हैं . जमींदार सामने पड़े सफ़ेद और काले रोड़ों के ढेर से एक काला और एक सफ़ेद रोड़ा उठाकर एक थैले में रख देगा फिर लड़की बिना देखे उस थैले से एक रोड़ा उठाएगी, और उस आधार पर उसके पास तीन विकल्प होंगे :
    १. अगर वो काला रोड़ा उठाती है तो उसे जमींदार से शादी करनी पड़ेगी और उसके पिता का कर्ज माफ़ कर दिया जायेगा.
    २. अगर वो सफ़ेद पत्थर उठती है तो उसे जमींदार से शादी नहीं करनी पड़ेगी और उसके पिता का कर्फ़ भी माफ़ कर दिया जायेगा.
    ३. अगर लड़की पत्थर उठाने से मना करती है तो उसके पिता को जेल भेज दिया जायेगा।

    पंचायत के आदेशानुसार जमींदार झुका और उसने दो रोड़े उठा लिए . जब वो रोड़ा उठा रहा था तो तब तेज आँखों वाली किसान की बेटी ने देखा कि उस जमींदार ने दोनों काले रोड़े ही उठाये हैं और उन्हें थैले में डाल दिया है।

    लड़की इस स्थिति से घबराये बिना सोचने लगी कि वो क्या कर सकती है , उसे तीन रास्ते नज़र आये:
    १. वह रोड़ा उठाने से मना कर दे और अपने पिता को जेल जाने दे.
    २. सबको बता दे कि जमींदार दोनों काले पत्थर उठा कर सबको धोखा दे रहा हैं.
    ३. वह चुप रह कर काला पत्थर उठा ले और अपने पिता को कर्ज से बचाने के लिए जमींदार से शादी करके अपना जीवन बलिदान कर दे.

    उसे लगा कि दूसरा तरीका सही है, पर तभी उसे एक और भी अच्छा उपाय सूझा , उसने थैले में अपना हाथ डाला और एक रोड़ा अपने हाथ में ले लिया . और बिना रोड़े की तरफ देखे उसके हाथ से फिसलने का नाटक किया, उसका रोड़ा अब हज़ारों रोड़ों के ढेर में गिर चुका था और उनमे ही कहीं खो चुका था .

    लड़की ने कहा – हे भगवान ! मैं कितनी फूहड़ हूँ . लेकिन कोई बात नहीं .आप लोग थैले के अन्दर देख लीजिये कि कौन से रंग का रोड़ा बचा है , तब आपको पता चल जायेगा कि मैंने कौन सा उठाया था जो मेरे हाथ से गिर गया.

    थैले में बचा हुआ रोड़ा काला था , सब लोगों ने मान लिया कि लड़की ने सफ़ेद पत्थर ही उठाया था.जमींदार के अन्दर इतना साहस नहीं था कि वो अपनी चोरी मान ले .लड़की ने अपनी सोच से असम्भव को संभव कर दिया.

    मित्रों, हमारे जीवन में भी कई बार ऐसी परिस्थितियां आ जाती हैं जहाँ सबकुछ धुंधला दीखता है, हर रास्ता नाकामयाबी की और जाता महसूस होता है पर ऐसे समय में यदि हम परमपरा से हट कर सोचने का प्रयास करें तो उस लड़की की तरह अपनी मुशिकलें दूर कर सकते हैं
    …………………………………………………………………….
    ‘ગાલિબ મેરે કલાલમેં ક્યું કર મઝા ન હો ?
    પીતા હું ધોકે ખુસરવે શીરી સુખન કે પાંવ.’
    મારી રચનાઓ કેમ સરસ … દરબારી કવિ હોવાના કારણે ખુસરોને પણ સુલતાનોની તારીફ કરતી શાયરી રચ્યા વિના છૂટકો ન હતો. … અને
    સાધુ પ્યાસા ક્યું?
    ઘોડા અડા ક્યું ?
    બન્નેના જવાબ
    જવાબ – લોટા ન થા
    ………………………………………………..
    एक बार एक किसान का घोडा बीमार हो गया। उसने उसके इलाज के लिए डॉक्टर को बुलाया। डॉक्टर ने घोड़े का अच्छे से मुआयना किया और बोला, “आपके घोड़े को काफी गंभीर बीमारी है। हम तीन दिन तक इसे दवाई देकर देखते हैं, अगर यह ठीक हो गया तो ठीक नहीं तो हमें इसे मारना होगा। क्योंकि यह बीमारी दूसरे जानवरों में भी फ़ैल सकती है।”

    यह सब बातें पास में खड़ा एक बकरा भी सुन रहा था। अगले दिन डॉक्टर आया, उसने घोड़े को दवाई दी चला गया। उसके जाने के बाद बकरा घोड़े के पास गया और बोला, “उठो दोस्त, हिम्मत करो, नहीं तो यह तुम्हें मार देंगे।” दूसरे दिन डॉक्टर फिर आया और दवाई देकर चला गया। बकरा फिर घोड़े के पास आया और बोला, “दोस्त तुम्हें उठना ही होगा। हिम्मत करो नहीं तो तुम मारे जाओगे। मैं तुम्हारी मदद करता हूँ। चलो उठो”

    तीसरे दिन जब डॉक्टर आया तो किसान से बोला, “मुझे अफ़सोस है कि हमें इसे मारना पड़ेगा क्योंकि कोई भी सुधार नज़र नहीं आ रहा।” जब वो वहाँ से गए तो बकरा घोड़े के पास फिर आया और बोला, “देखो दोस्त, तुम्हारे लिए अब करो या मरो वाली स्थिति बन गयी है। अगर तुम आज भी नहीं उठे तो कल तुम मर जाओगे। इसलिए हिम्मत करो। हाँ, बहुत अच्छे। थोड़ा सा और, तुम कर सकते हो। शाबाश, अब भाग कर देखो, तेज़ और तेज़।”

    इतने में किसान वापस आया तो उसने देखा कि उसका घोडा भाग रहा है। वो ख़ुशी से झूम उठा और सब घर वालों को इकट्ठा कर के चिल्लाने लगा, “चमत्कार हो गया। मेरा घोडा ठीक हो गया। हमें जश्न मनाना चाहिए।आज बकरे का गोश्त खायेंगे।”
    ઘોડા અને બકરાની જગ્યાએ કોને મુકશો ?
    ……………………………………………….સુનો
    5:27
    Seene Mein Sulagte Hain | The King Of Ghazals – Live Concert | Jagjit Singh
    Saregama GenY
    4 વર્ષ પહેલાં70,816 વાર જોવાઈ
    Jagjit Singh – Close To My Heart Live Concert Song :- Seene Mein Sulagte Hain Singer :- Jagjit Singh Music Director :- Anil ..

  2. pravinshastri ઓગસ્ટ 8, 2016 પર 2:56 પી એમ(pm)

    બસ કશું જ બોલાય નહિ. વિદ્વાનોની સમક્ષ મોં બંધ રાખીને બેસવાથી જ જે થોડીઘણી ઈજ્જત હોય તે જળવાઈ રહે. પ્રણામ આતાજી પ્રણામ પ્રજ્ઞાજી.

  3. મનસુખલાલ ગાંધી, U.S.A. ઓગસ્ટ 9, 2016 પર 5:40 પી એમ(pm)

    બહુ ગમ્યું……….સરસ છે………..

  4. aataawaani ઓગસ્ટ 25, 2016 પર 5:43 પી એમ(pm)

    પ્રિય પ્રવિણાબેન
    તમારા જેવી ભણેલ સન્નારીઓને મારી ગઝલ ગમે છે . એથી મારી ઉંમર ઘ ટ તી હોય અને શક્તિ વધતી હોય .એવો અનુભવ થાય છે .

आपके जैसे दोस्तों मेरा होसला बढ़ाते हो .मै जो कुछ हु, ये आपके जैसे दोस्तोकी बदोलत हु, .......आता अताई

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