Daily Archives: જુલાઇ 19, 2016

એકજ દે ચિનગારી મહાનલ એકજ દે ચિનગારી”

image1

 એકજ દે ચિનગારી મહાનલ એકજ દે  દે ચિનગારી
ચાંદો સળગ્યો સૂરજ સળગ્યો સળગી આભઅટારી
એક ન સળગી સગડી મારી  વાત વિપતની ભારી
મહાનલ એકજ દે ચિનગારી   …1
ચકમક  લોઢું ઘસતાં ઘસતાં ખર્ચી જિંદગી સારી
જામગરીમાં તણખો ન પડ્યો  વ્યર્થ ગઈ મેહનત મારી
મહાનલ એકજ દે  ચિનગારી  …2
ઠંડીથી મુજ કાયા થથરે    ખૂટી ધીરજ મારી
વિશ્વાનલ  હું અધિક ન માગું  માગું એક ચિનગારી
મહાનલ એકજ દે  ચિનગારી   .  …3
 આ કવિતા બનાવનાર શ્રી હરિહર  ભટ્ટ  અમદાવાદમાં રહેતા હતા   . હાલ ઘણા વખતથી  સ્વર્ગમાં વસે છે  .  તેઓ જ્યારે ભાવનગર  સૌરાષ્ટ્ર મા રહેતા હતા   . ત્યારે  તેઓ  ભાવનગરમાં તખ્તેશ્વર  મહાદેવના મઁદિરે સાંજના  જતા  એક વખત  તેઓને  રાતના ઝગમગતા  તારા જોઈ એક કવિતા બનાવવાની સ્ફુરણા થઈ   . જે  મેં ઉપર લખી છે   .  આ સ્વ  , હરિહર   ભટ્ટને    તો હું ઓળખતો પણ એના દિકરા શ્રી સુબોધ ભટ્ટ અને શ્રી સુધાકર ભટ્ટ  અને  દીકરી મધુ બેન અને જમાઈ શ્રી જયંત વ્યાસને પણ  હું  સારીરીતે ઓળખું છું  . હરિહર ભટ્ટ  બહુ ઓછા બોલા માણસ હતા   .  પણ હું તેઓ એકલા હોય ત્યારે  થોડીક રમૂજ થોડીક કરી લેતો  પણ તેઓ હસ્ત તો નહીં  પણ કશો પ્રત્યત્તર  પણ આપ તા  નહીં   .   આજે તેઓ મને થોડાક યાદ આવ્યા છે  . તો તેઓની થોડીક રમુજી વાત કરી લઉં    .  મારાદાદા 125 કરતા વધુ સમય થી સ્વર્ગમાં રહે છે  .  તેઓ મને  થોડા દિવસ પહેલા મને મળવા  આવ્યા હતા  . તે મને  વાત કરતા હતા કે હવે સ્વર્ગમાં પણ  કોમ્પ્યુટર  વપરાય છે અને એવી સગવડ પણ થઈ છે કે  હવે કોઈનો જીવ લેવા માટે યમદેવને  પૃથ્વી લોક સુધી ધક્કો નહીં ખાવો પડે   . ચિત્ર ગુપ્ત ત્યાં બેઠાં બેઠાં જ  યમદેવ પાસે જીવ ખેંચાવી લેશે  . શ્રી હરિહર ભટ્ટ હું એના વિશે લખીશ તો એ  મને પોતાનો ગમો અણગમો  મારા ઈ મેલ ઉપર મોકલી આપશે  , તો એના વિશે થોડીક વાત કરું છું  . જ્યારે તેઓએ  તખ્તેશ્વર  પાસે  એક ચિનગારી માગવાની વાત કરી કે  મને એક નાનકી અમથી ચિનગારી આપો   , ત્યારે  મહાદેવે તેમને એવું કીધું કે તું  સીધી અગ્નિ દેવ પાસે મહાનલ  પાસે માગણી કર  હારી હરભટ્ટ સીધા અગ્નિ દેવ પાસે ગયા અને તેની પ્રશંશાનો શ્લોક  બોલ્યા   .
चत्वारि श्रृंगा  त्रयो अस्य पादा  द्वे शीर्षे  सप्त हस्ता   હરિહરભટ્ટની  સ્તુતિ સાંભળી  તેમના ઉપર અતિ પ્રસન્ન થયા  , અને બોલ્યા  તારે શું જોઈએ છીએ ત્યારે  હરિહર ભટ્ટ  બહુ નમૃતાથી હાથ જોડીને બોલ્યા  પ્રભુ  મારે એક જરાક જેટલી ચિનગારી  જોઈએ છીએ મારે બીજું  કંઈ  અધિક   .  નથી જોતું   . આ વખતે  અગ્નિ દેવતાને  શંકર  દાદાને કુંવારો ગરીબ  આંધળો  વાણિયો  છેતરી ગયો હતો તે વાત યાદ આવી  .  એટલે તેઓ  બોલ્યાકે  એકજ ચિનગારીમાંતો  આખું જગત સળગી જાય  હું  એવું   વરદાન નહીં આપું પણ  તારા બે દીકરા એનો પરિવાર દીકરીનો  પરિવાર બધાને હું   અમેરિકા મોકલી આપું છું  . એવું કહી અગ્નિદેવ અદૃશ્ય  થઈ ગયા   .

आताश्रीकि हरजाई कविताका भाग #1-6

पलवन्ते पसतरा  निरे मानवा :  घ्ननन्ति   राक्षसांन
कपय :  कर्म कुर्वन्ति  कालस्य कुटिला गति :
समय  समय  बलवान है  नहीं पुरुष बलवान
काबे लुंठी गोपिका  यही अर्जुन यही बान
अब में जो भजन लिखने जारहा हुँ वो  संत तुलसी दासजिका भजन

“भजो  मन राम चरण सुख दाई   ”

और भक्त कवि सुरदसका  भजन

“नाथ कैसे गजको  बंध  छुड़ायो ”  इस ढंगसे  गाया जा सकेगा   .
संतो भाई  समय बड़ा हरजाई   समयसे कौन बड़ा  मेरे भाई
संतो भाई समय बड़ा हरजाई   ….१
राम अरु लछमन  बन बन भटके संगमें  जानकी माई
कांचन मृगके पीछे दौड़े  सीता हरण  कराई  ….संतो भाई  ….  २
सुवर्ण मयि ंलंका रावनकी   जाको समंदर  खाई
दस मस्तक बिस भुजा कटाई  इज़्ज़त  खाक मिलाई  ….सन्तोभाई      ३
राजा युधिष्ठिर  द्यूत क्रिडामें   हारे अपने भाई
राज्यासन  धन सम्पति हारे  द्रौपदी  वस्त्र हराई  …संतो भाई    ..४
योगेश्वरने  गोपी गणको  भावसे दिनी विदाई
बावजूद  अर्जुन था  रक्षक बनमे गोपी लुंटाई  …सन्तोभाई .५
जलाराम की  परीक्षा करने प्रभु आये वरदायी
साधुजनकि  सेवा करने पत्नी दिनी वीर बाई  …सन्तोभाई  ..६
आजादीके लिए बापूने  आ हिंसक लदत चलाई
ऐसे बापूके सीने पर हिंसाने  गोली चलाई  ,, संतो भाई  ७
देशिंगा दरबार नौरंगसे गदा निराश न जाई
समा पलटा जब उस नौरंगका बस्तीसे भिक मंगाई  …संतो भाई   ८
विक्रमके दादाकि तन्खा   महकी बारा रुपाई
विक्रम  खुदकी एक मिनितकि बढ़ कर बारा रुपाई   …संतो भाई   ९
तान्याकी  ग्रेट  ग्राण्ड मधरथी  नामकी जवेर बाई
हज़ारो नग़में उसकी जुबां पर कैसे  हो हरी फाई। …संतो भाई   १०

प्रभाशंकर  जोशी उमरमे छोटा था मेरा वो भाई
कठिन समस्या हल करके वो  अफ्रीका अमेरिका जाई   ….सन्तोभाई   ११
पानी  भरकर बर्तन  सरपर  दौडकि हुई  हरिफाई
जवां लड़कियां  पीछे रह गई  भानु पहली आई   …सन्तोभाई  १२
पानीका  झग़डा पोलिस लाइन में   होताथा  मेरे भाई
दल्पतरामने भानुमतिकि  नलसे दोल हटाई   …सन्तोभाई   १३
रणचण्डी  बन भानुमतिंे ने  अपनी दोल उठाई
दलपतरामके  सरमे ठोकी  लहू लुहान हो जाई  ….सन्तोभाई   १४
अब वो भानु चल नहीं सकती  निर्बल  होती जाई
अपने हाथों  खा नहीं  सकती कोई खिलावे तो खाई   …सन्तोभाई  १५
दो हज़ार सात अगस्तकि  जब दूसरी तारीख  आई
इस फानी दुनियाको  छोड़के भानने लीनी विदाई   …सन्तोभाई    १६
भानुमति  जब स्वर्ग गई तब उदासीनता  छाई
गोरी  लड़की आन  मिली तब

(परवरदिगारने  मेरी मायूसी  हटानेके  लिए  भेजा)

मायूसी चली जाई। ..सन्तोभाई  …१७
नंगे पाऊ बकरियां  चराई  कॉलेज डिग्री पाई
कोलगेटने  उसकी बुध्धि  परख कर नई नई शोध करवाई   …सन्तोभाई  ..१८
घरमे बैठके लिखता पढ़ता यार्डमे  करता सफाई
सुरेश जॉनीने  उसकी कलाको  मुल्क मशहूर  करवाई   ..सन्तोभाई   ..१९
गोरधन भाई पोपटने एक दिन सिंहण मार गिराई
जब गोरधन भाई निर्बल  हो गए थे  मख्खी  उड़ाई न जाई  …संतो भाई   २०
एक गुजराती पटेल सपूतने   श्रीजीसे  माया लगाई
श्रीजी  आके  ह्रदय बिराजे तब कई मंदर  बन जाई  …संतोभाई   २१
भगवान एक्टरने अपनी अलबेला  मूवी बनाई
नाम कमाया  दाम कमाया अंत करुण हो जाई  …सन्तोभाई   २२
ग्रीस देशके  सिकन्दरको समयने जित करवाई
जब गयथा छोड़के दुनिया  खाली हाथों   जाई  …सन्तोभाई   २३
स्टेशन ऊपर नरेंद्र मोदी बेचता था वो चाई
समयने उसको साथ दिया तो  वडा प्रधान  बन जाई  ..संतो भाई   २४
काले कर्म तुनेबहोत किए थे  जब थे बाल काशाई   .
अब तुझको  सुधरजना  होगा बालने सफेदी दिखाई   …संतो भाई  २५
देख तपस्या  विश्वामित्रकी  इंद्रको इर्षा  आई
इन्द्रने  भेजी अप्सरा  मेनका  तपस्या  भंग  हो जाई  ..सन्तोभाई   २६
ऋतुमती  मेनका ऋषिको भेटि  जोरसे बाथ भिड़ाई
मेनका ऋषि विश्वा मित्रसे गर्भवती   हो जाई  …सन्तोभाई   ..२७
शकुंतलाका  जन्म हवा तब  ऋषिको देने आई
ऋषिने साफ़ इनकारकिया तब  कण्व  मुनिके पास जाई  …सन्तोभाई  ..२८
छोटी शकुंतला  कण्व मुनिके आश्रममें  जब आई
कामधेनुका दूध पि करके  जल्द जवां  हो जाई  …संतोभाई   …२९
जवां शकुंतला  फुलवाडिमे  फूल चुँटनेको जाई
हवा आकर्षित  राजा दुष्यंत  गांधर्व  लग्न हो जाई  …संतोभाई   ..३०

सबकोई सहायक सबल जनोके  निर्बलको न  सहाई
पवन झगावत  अगन ज्वाला  दीपक देत बुझाई   …संतो भाई   ..३१
अपसरकि आशासे  बूढ़ा तपस्या करने जाई
अप्सरा न आई ठंडी  आई  सख्त जुकाम हो जाई  ….संतो भाई   ३२
जब तक रहो दुनियामे ज़िंदा:काम करो मेरे भाई
इतना ज्यादा :काम न करना  काम तुझे खा जाई  …संतो भाई   ..३३
लिखना पढ़ना काव्य बनाना येतो है चतुराई
काम क्रोध अरु मनबश  करना अति कठिन है भाई   …संतो भाई   ३४
समदरको मीठा करदेना कार्य कठिन संतो साईं
अपने आपको मीठा करनेमे है अति कठिनाई  ..संतो भाई  ३५
प्रेमका रस्ता बहुत कठिन है पूरा न होने पाई
फंस गया मजनू घोर जंगलमे फरहाद न पर्वबत  लाई ..संतो भाई  .. ३६
गर्भमे था जब तू माताके रक्षा  करती माई
बीबी बच्चे पैदा हुवे तब माको दिनी विदाई    …संतो  भाई  ३७
भक्ति अंतकाल  काम आएगी  बात अच्छी बतलाई
परवश होके मरते देखे  काम न आई भक्ताई  …संतो भाई  ३८
चडस शराबकी बुरी आदत  है  जल्दी न छूटी जाई
उसका संग करने वालोको  जल्द क़ज़ा ले जाई  ..संतो  भाई  ३९
अच्छे काम करो दुनियामे  इच्छो सबकी भलाई
दिन जनोंको  मदद करो तुम  छोडो दिलकी बुराई   …संतो भाई  ४०
निहाँ रख अपने लुत्फको  बाबा किसे कहो हरसाई
हासिद तो जल जाएंगे  लेकिन तुझको देंगे जलाई   …संतो भाई  ..४१
गरजके दोस्तों हो जाते है  गरज पतेचले जाई
सच्चा दोस्तजो होगा तेरा साथ रहेगा सदाई  …संतो भाई। .४२
प्रेमका तन्तु अति नाजुक  है  मत तोड़ो झटकाई
तुटनेसे  फिर जुड़ता नहीं है  जुड़े तो गाँठ पडजाई   …संतो  भाई  ४३
नंगा भूका  सो रहताथा  जब थी तुझे  गरीबाई
अब वो दिन   तेरे  पलट  गए है  मत करना कंजु साईं   ..संतो भाई   ..४४
शेरको दण्डवत  प्रणाम करें और  चूहा डराने जाई
ऐसे भी इन्सान होते है  लोमड़ी जैसे भाई   ..संतो भाई  ४५
पतिव्रता पहने  टूटे वस्त्र  वैश्या सुभट सोहाई
दूध बेचनको  घर घर भटके  बैठे  मद्य  बिकाई  ..संतो भाई  ..४६
कंप्यूटरमें  लिखता था   तिन  भाषामें कविता बनाई
गिर  पड़ा   सीमेंट  कॉन्क्रीट  ऊपर  hip की  हड्डी टूट जाई  ,,,संतो  भाई   ४७
बगैर  मरजिके यहां  हैयात  मुझे ले आई
न होगी मेरी  इच्छा  फिरभी  एक दिन  क़ज़ा  ले जाई  …संतो भाई  ४८
पराधीनको  सुख नहीं मिलता  याद रख्खो  मेरे भाई
चन्द्र  शंकरके सर पर रहता  पतला होता जाई  ..संतो भाई    ४९
चित्ता मुर्दा  मनुष्य देहको आगमे देती जलाई
चिंता ज़िंदा : जिस्म बशरको  धीरेसे  देती जलाई   …संतो भाई  ५०

दरखतके रंग बदलजाते  है  जबकि पतझड़   आई
समय आने पर इन्सानोके  ख्याल  बदलते जाई  ….संतो भाई   ..५१
बैठ जातीथी आगोशमे  मेरे लब पे लब लगाई
दाढ़ी मुछकी देख सफेदी  भागी मुंह मचकोडाई   …संतो भाई .५२
प्याजका  था जब बुरा ज़माना  कोग मुफ्त ले जाई
वोही प्याज़ अब  महँगी हो गई  ग़रीबसे   खाई न जाई  …संतो भाई   ५३
अति पापिष्ट जमारो पाराधि   धीवर और कसाई
दुनिया मांसाहारको  छोड़े  सब होव सुख दाई  …संतो भाई  ..५४
पापी जनका पाप धोनेको स्वर्गसे गंगा आई
वोही  गंगा अब मैली  हो गई  कौन करेगा सफाई  ..संतो भाई  ..५५
भागयका  लिखा मिटता नहीं है  किसीसे न फर्क  कराई
विभीषका लंका मिली और मारुती  तेल लगाई   ..संतो भाई  ..५६
मोह माया अरु  मन मरजावे   अपना जिस्म मरजाई
आदत तृष्णा  आशा न मरती  प्राण  जाए तब जाई  …संतो भाई। .५७
रंजो  मसाइबकी  परवा  नहीं रखता मैं भाई
हौसले रखता हु मेरे दिलमे  कष्ट  उठा  ले जाई  …संतो भाई  ..५८
विद्या वनिता और  कोई बेली  जात न पूछने  जाई
जो रहे नित उसीकी  संगतमे  ताहि में लिपटाई   ..संतो भाई  ..५९
सायगल  राज कपूर  खन्नाने इज़्ज़त  अच्छी कमाई
मयकश  होजानेके सबबसे  अपनी  जान  गवाई  ..संतो भाई   ..६०
चेलेष्टि अबदलाका  पति  था मेरा वेवाई
पोष्टिक खुराक नहीं खानेसे  मगजकि  शक्ति  गंवाई   …संतो भाई  ६१  .
मगजकि  शक्ति  अच्छी थी  तब  काव्य तुरत  बनजाई
अब  वो बातें  गुजर चुकी है  मगजने शक्ति गंवाई  ..संतो भाई  .६२

खार चुभनेसे सारी जमिनको चमड़ा कैसे  मढ़ाई
चंदेकि जूती पहननेसे  खारसे देती बचाई   ..संतो भाई   …६३
जुबांको  न ईजने गोयाई न दिलको पज़ीराई
ऐसे निज़ामे महफ़िल होतो  महफिल्को बाई बाई   ..संतो भाई। .६४
दस आदमीके कहने परभी  दाढ़ी  ना कटवाई
माशुकका  मन कहना और  दाढ़ी दी कटवाई   ..संतो भाई  ६५
सुन्नी सद्दाम हुसैनको  इक दिन समयने गद्दी दिलाई
कुर्द शियाको  मार दिए जब  समयने  फांसी दिलाई   ..संतो भाई   ..६६
दिल्ली जिसका जन्म हवा वो  मुशर्रफ  पाकिस्तान जाई
पाकिस्तानका  हाकम बन बैठा अब घर कैदमें जाई   ..संतो भाई  ..६७
लीबिया देशका  मालिक गद्दाफिने मगरूरी सरपे चढ़ाई
अमरीका देशसे  दुश्मनी  करके खुदकी कबर खुद वाई   संतो भाई   ..६८
धीरजके धरनेसे हाथी मन भर चारा खाई
कुत्ता रोटिके टुकड़े के कारण घर घर जाई  संतो भाई  ..६९
संतोंने विषयाको छोड़ी मूढ़ तामे लिपटाई
ज्यों  नर डारत  वमन वमन कर कुत्ता स्वाद सों खाई   ..संतो भाई   ७०
भूख गई  और  लड्डू मिले और ठण्ड गई  मिले कंथाई
जवानी गई नाज़नीन  मिले  तो तासो दिल बहलाई   …संतोभाई    ७१
सिर्फ अपना ख्याल करके  जिए तो हम क्या जिए भाई
जिंदादिलिका   तक़ाज़ा ये  है  औरोंके  लिए जीते जाई .. संतो भाई  ..७२
वामन बनके  बलिराजासे  प्रभुने  किनी गड़ाई
कायनात  लीनी तिन कदमोमे  नाम वामन रह जाई   संतो भाई   ७३
सबक  तुझे  देती है  तेरे बालों की  सफेदाई
बुरे कामका ख्यालोको तुम  छोड़ दे मेरे भाई   ..संतो भाई   ..७४
देवताओंने  दिया हवा विष शंकर प्रेमसे खाई
चोरी छुपिसे अमृत खाया  रहने शीश कटाई    संतो भाई    ७५
शास्त्र  कारोको  चन्द्र के ऊपर अमृत  दिया दिखाई
बुध्धि शक्तीने  साबित किया की चन्द्र पे हवा तक नाइ  …संतो भाई  ७६
मासरका कभी गर्व  न करना  न करना अदेखाई
ये है तेरे जानी  दुश्मन  धीरेसे  खा जाई    …संतो भाई    ७७
खबर नहीं  तुझे है  दुनियामे पलकी मेरे भाई
फिरतू क्यों  करता रहता है कल परसों की बड़ाई    …संतो भाई  ..७८
हाशुक तू जब  बात करती हो लब तेरे मुस्कुराई
जब तू आहिस्ता चलती हो  कमर तेरी लचकाई  ..संतो भाई   ७९
अति बरसातका   न बरसना  अच्छा अति धुप अच्छा न भाई
अति बशरका  न बोलना अच्छा अति अच्छी  न  चुपकाई    .संतो भाई   ..८०

लुत्फ़ और मसर्रत ढूंढनेके लिए मत घर घर भटकाई
इस दुनियामें  कोई नहीं ऐसा ग़म  तेरा  ले जाई  …संतो भाई  ..८१
फूलों को  खबर है  मरनेकी  फिरभी हस्ते जाई
मर्दुमको  मालुम है मरना रोकर  जीवन बिताई। .संतो भाई .८२
परनरिसे प्रीत  न करना  न करना  भलमन साईं  …

(अहमदबादमे मेरा ४० की उमरका मेरा दोस्त था  इसकी औरत

तक़रीबन  २२ सालकी उमरकि  होगी   औरत क़ा  बाप  और

मेरा बाप दोस्त थे  में उसके घर  रहता था  मुझे वो औरत अच्छी

हिफाज़त करती थी बिलकुल निर्दोष भाव था  एक दफा  औरत ने

मेरी पास चूड़िया मंगाई  मैंने उसको   चूड़ियां  ला के दी  उसने मुझे

पूछा  कितने पैसे लगे ? मैंने कहा  क्यों कीमत  की पूछती   हो

ये चूड़िया  मेरी ओरसे तोहफा  है   . क्योंकि  तू मेरी  बहन भी तो हो ?

फिरभी उसने मुझे जबरन  पैसे दिए     .

और उसने अपने पतिसे कहा   कितनी अच्छी  चूड़ियां है  ?

हिम्मत भाई पास मैंने  मंगवाई थी  वो पैसा नहीं लेताथा

लेकिन मैंने उसको ज़बर  दस्ती दिया  पति मुझ पर

बहुत गुस्से हुवा  और मुझको घरसे निकाल दिया

इसी लिए   मैंने लिखा हैकि    दुसरेकी स्त्रीको  भलमन साईं  भी

नहीं करना चाहिए  वहमकि  कोई दवा नहीं है  )
दूरसे उसको राम राम  कहना  उसमे तेरी भलाई   …संतो भाई  .. ८३
तुम्बेका जो पानी पीए और  लोढ़ी ढेबर  खाई
ज़मीन के ऊपर सोनेका हो उसके घर कभी बैद न जाई  …संतो भाई। .८४
जीनकारी  चोरी मार फाड़  ऐसी छोडो बुराई
ऐसे दुष्टका संग न करने में है तेरी भलाई   …संतो भाई  ..८५
सियाह बख्तिमे  दुनियामे  कोई न करेगा  सहाई
तारीकी  जब आ पड़ती है  साया छोड़के जाई  संतो भाई  ..८६
क्यारी बनाके केसरकी उसमे पिस्ता  डाला जाई
अंगूर रसका  पानी पिलाओ  प्याजकि गंध न जाई  …८७
आज कलके युवक   क्या करते है  ज़िंदगी भरमे कमाई
डिग्री लेते  नौकरी  करते  पेंशन  खाके  मर जाई  …संतो भाई  ..८८
ज़िन्दगीमें  कोई ग़म न होतो  जिन्दगीको मज़ा नाई
राह आसानी वाला होतो  गुमराहकि मज़ा नाई  …संतो भाई  ..८९
हड्डी मेरी टूट जानेके बाद  अशक्ति आई
हौसला  तो  है  दिलमे यारो शरीरमे शक्ति नाई  …संतो भाई  ९०
हमसाया  तक  जाने नहीं तो  जगमे कैसी बढ़ाई
साहसका कोई काम न किया हो  फोगट ज़िंदगी गंवाई  …संतो भाई   ..९१
उनके जैसा नेक अरु  उनके जैसा बद नाई
उनकी नफरत और मुहब्बत  दोनोकी हद नाई  …संतो भाई  ..९२
अग्नि रूठे  जलको जलादे  जल रूठे पथराई
नारी  रूठी (स्त्रीको रूठने मत दो उसका सनमान  करो  )

वो कर  बैठे   नकरे दुर्गा माई   …संतो भाई  ..९३
माली बनके फल फूल बोना पानी देना पिलाई
मालिक बनके  ंखुदको  खाना सबको देना खिलाई   …संतो भाई  ..९४
मानव जातने प्रगति किया आसमानमें ऊँचे जाई
इतना ऊँचे  पहुंच  जानेका  देवका मकडर नाई  ..संतो भाई   ..९५
पति मर्जनके बादमे  विधवा होती है दू :ख  दाई
कानजी  बापा के  मरनेसे  दू :खी हो गई  सुन्दर आई  ….  ९६
शत्रुको मार डालनेके  लिए भीष्मने राह दिखाई
जब तक ख़त्म न करसको तुम  मत देना धमकाई   ..संतो भाई   ९७
बगैर  लोनकी   भाजी मिली  वो बड़े  शौकसे   खाई
प्रेमसे कॄष्णको  दलिया  खिलाई  खीर समझ के  खाई  ..संतो भाई  ..९८
वाल्मीकि  रहज़न ने  अपने हिंसाको  अपनाई
नारद ऋषिने उस पापीको अच्छी राह दिखाई   ..संतो भाई  ..९९
बहुत ढूंढा  खुदाको  हमने मंदर मस्जिद माई
गौर जहनसे  सोचा हमने  मिला मन मंदर माई   संतो भाई  ..१००
मैं  बगीचेमें  फिरताथा तब सुन्दर युवती आई
मेरी उमरका ख्याल न किया और  चुंबन  कर चली जाई  संतो भाई  ..१०१
लाप्स्टर कहे  हम खेलतेथे  बङे गहरे  समंदर माई
अगले जन्मके  दुश्मनने हमे  लोगोको दिया खिलाई   ..संतो भाई  ..१०२
बेर बबूलकी  झाड़ी के बिच  भटकने  वाला “आत्ताई “
समयने उसको अमेरिका भेजा  देखो कैसी जमाई   .. संतो भाई  ..१०३