આ જમાનામાં આ વિજ્ઞાન યુગમાં કુતરા પણ આશીર્વાદ આપવા માંડ્યા ભસવાનું કરડવાનું ભૂલી જઈને

Bless you

मेरे अज़ीज़ अहबाब
उम्मीदथीकि मैं “संतोभाई ” नग़मा  सो  कलामकी  बनाउ वो    उम्मीद  पुरिहोगई   अब आपकी खिदमतमे  एम नामालूम  शायरका  नग़मा  पेश करता हुँ  ..
अजब हैरान हुँ भगवन   तुझे क्यों  कर रिझाऊ    मैं
नहीं है चीज़ कोई ऐसी जिसे सेवामे लाऊँ मैं   …१
करूँ कैसे  मैं आवाहन  की तुम मौजूद  हो हरजा
निरादर है  बुलाने को  अगर घंटी बजाउ मैं   ..२
तेरी है ज्योत्से रोशन  है  सूरज चन्द्र और तारे
बड़ा अंधेर है  तुझको  अगर  दीपक दिखाऊ  मैं  ..३
तुंही  व्यापक  हो मूर्तिमे  तुहीं व्यापक  हो फुलोमे
भला भगवान पर भगवानको कैसे चढाऊँ   मैं  …,,४
न भुजा है न सीना है  न गर्दन  है न पिशानी
तू है निर्लेप नारायण  कहां चंदन  चढ़ाऊँ  मैं  ..५
लगाना भोग कुछ तुझको  ये एक अपमान करना है
खिलता है जो आलमको  उसीको क्या खिलाओ मैं  …६
مجھے امید تھی  کی مے  میری ” ہرجائی” “
نغمہ ایک سو کلامکی  بناؤ  وو انشااللہ پوری ہو گئی اب می  آپ جنابکی خدماتمے  اک نا معلم شیرکی غزل  پیش کرتا ہوں
عجب حیران ہوں  بھگوان  تجھے کیوں کر  رجحان  مے
نہی ہے چیز کوئی ایسی جسے sevaame لاہو مے  …١
کروں  کیسے مے آواھن    کی تم موضود ہو  ہر جا
نر ادر  ہے بلانے کو اگر گھنٹی بجو می  ..٢
تیری ہے جیوتسے روشن  ہے سورج چندر ور تارے
بدا اندھیر ہے  تجھکو  اگر دیپک دیکھو ن  مے  …٣
تونہی   ویاپک ہو مرتیمے تھی ویاپک ہو فلومے
بھلا بھگوان پر بھگوان کو  کیسے چڈھاوو  مے  ..٤
ن بھجا ہے ن سینہ ہے ن گردن ہے ن پیشانی
تو ہے نرلیپ ناریاں کہاں  چاندن چڈھاوو می  …٥
لگانا بھوگ کچھ تجھکو یہ ایک اپمان کرنا ہے
کہلاتا  ہے جو عالمکو  اسکو کیا کھلاؤ  مے  .  
عجب  حیران ہو بھگوان تجھے کیوں کر رجو مے

2 responses to “આ જમાનામાં આ વિજ્ઞાન યુગમાં કુતરા પણ આશીર્વાદ આપવા માંડ્યા ભસવાનું કરડવાનું ભૂલી જઈને

  1. pragnaju July 18, 2016 at 11:53 am

    जैकारा माँ वैष्णो रानी दा , बोल साँचे दरबार की जय 💐
    एक भक्त इमली के वृक्ष के नीचे बैठकर भगवान् का भजन कर रहा था ।
    एक दिन वहाँ नारद जी महाराज आ
    गये ।
    उस भक्त ने नारद जी से कहा कि आप इतनी कृपा करें कि जब भगवान के पास जाये तब उनसे पूछ लें कि वे मुझे कब मिलेंगे ?
    नारद जी भगवान के पास गये और पूछा कि अमुक स्थान पर एक भक्त इमली के वृक्ष के नीचे बैठा है और भजन कर रहा है,
    उसको आप कब मिलेंगे ?

  2. aataawaani July 18, 2016 at 12:42 pm

    नारदजीने भगवानसे पूछ की आप एक भक्त जो तपस्या कररहा है उसको कब मिलोगे तब भगवानने नारदजी से कहा उस भक्त को बोलो तपस्या छोड़के अपने घरको वापस जाय . और प्रतिज्ञा ले ले की मैं हमेशा अच्छे आचरण रखे किसीकी निंदा न करे अभिमान न करे स्वभाव सरल रख्खे किसीको उपदेश देता न फिरे . और में उसको नहीं मिलूंगा तोभी उसकी मनो कामना सिद्ध होगी .

आपके जैसे दोस्तों मेरा होसला बढ़ाते हो .मै जो कुछ हु, ये आपके जैसे दोस्तोकी बदोलत हु, .......आता अताई

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