आताश्रीका हरजाई कविताका भाग #

सबकोई सहायक सबल जनोके  निर्बलको न  सहाई
पवन झगावत  अगन ज्वाला  दीपक देत बुझाई   …संतो भाई   ..३१
अपसरकि आशासे  बूढ़ा तपस्या करने जाई
अप्सरा न आई ठंडी  आई  सख्त जुकाम हो जाई  ….संतो भाई   ३२
जब तक रहो दुनियामे ज़िंदा:काम करो मेरे भाई
इतना ज्यादा :काम न करना  काम तुझे खा जाई  …संतो भाई   ..३३
लिखना पढ़ना काव्य बनाना येतो है चतुराई  
काम क्रोध अरु मनबश  करना अति कठिन है भाई   …संतो भाई   ३४
 समदरको मीठा करदेना कार्य कठिन संतो साईं
अपने आपको मीठा करनेमे है अति कठिनाई  ..संतो भाई  ३५
प्रेमका रस्ता बहुत कठिन है पूरा न होने पाई 
फंस गया मजनू घोर जंगलमे फरहाद न पर्वबत  लाई ..संतो भाई  .. ३६
गर्भमे था जब तू माताके रक्षा  करती माई
बीबी बच्चे पैदा हुवे तब माको दिनी विदाई    …संतो  भाई  ३७
भक्ति अंतकाल  काम आएगी  बात अच्छी बतलाई
परवश होके मरते देखे  काम न आई भक्ताई  …संतो भाई  ३८
चडस शराबकी बुरी आदत  है  जल्दी न छूटी जाई
उसका संग करने वालोको  जल्द क़ज़ा ले जाई  ..संतो  भाई  ३९
अच्छे काम करो दुनियामे  इच्छो सबकी भलाई
  दिन जनोंको  मदद करो तुम  छोडो दिलकी बुराई   …संतो भाई  ४०
निहाँ रख अपने लुत्फको  बाबा किसे कहो हरसाई
हासिद तो जल जाएंगे  लेकिन तुझको देंगे जलाई   …संतो भाई  ..४१
गरजके दोस्तों हो जाते है  गरज पतेचले जाई
सच्चा दोस्तजो होगा तेरा साथ रहेगा सदाई  …संतो भाई। .४२
प्रेमका तन्तु अति नाजुक  है  मत तोड़ो झटकाई
तुटनेसे  फिर जुड़ता नहीं है  जुड़े तो गाँठ पडजाई   …संतो  भाई  ४३
नंगा भूका  सो रहताथा  जब थी तुझे  गरीबाई
अब वो दिन   तेरे  पलट  गए है  मत करना कंजु साईं   ..संतो भाई   ..४४
शेरको दण्डवत  प्रणाम करें और  चूहा डराने जाई
ऐसे भी इन्सान होते है  लोमड़ी जैसे भाई   ..संतो भाई  ४५
पतिव्रता पहने  टूटे वस्त्र  वैश्या सुभट सोहाई
दूध बेचनको  घर घर भटके  बैठे  मद्य  बिकाई  ..संतो भाई  ..४६
कंप्यूटरमें  लिखता था   तिन  भाषामें कविता बनाई
गिर  पड़ा   सीमेंट  कॉन्क्रीट  ऊपर  hip की  हड्डी टूट जाई  ,,,संतो  भाई   ४७
बगैर  मरजिके यहां  हैयात  मुझे ले आई 
न होगी मेरी  इच्छा  फिरभी  एक दिन  क़ज़ा  ले जाई  …संतो भाई  ४८
पराधीनको  सुख नहीं मिलता  याद रख्खो  मेरे भाई
चन्द्र  शंकरके सर पर रहता  पतला होता जाई  ..संतो भाई    ४९
चित्ता मुर्दा  मनुष्य देहको आगमे देती जलाई  
चिंता ज़िंदा : जिस्म बशरको  धीरेसे  देती जलाई   …संतो भाई  ५० 

4 responses to “आताश्रीका हरजाई कविताका भाग #

आपके जैसे दोस्तों मेरा होसला बढ़ाते हो .मै जो कुछ हु, ये आपके जैसे दोस्तोकी बदोलत हु, .......आता अताई

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