Daily Archives: માર્ચ 11, 2016

समय बड़ा हरजाई |

प्लवन्ते परतरा  निरे  मानवा घ्ननंति  राक्षसान्
कपय: कर्म कुर्वन्ति कालस्य  कुटिला गति :
………………………………………………
समय समय बलवान है  नहीं पुरुष बलवान
काबे लुंटी गोपिका  एहि अर्जुन एहि बान
///////////////////////////////////////////////////
રાગ  :- ભૈરવી ,,  ભક્ત કવી સુરદાસના ભજન
नॉथ कैसे गजको बांध छुड़ाओ
————
संतो भाई समय बड़ा हरजाई  समयसे कौन  बड़ा  मेरे भाई 
संतोभाई  समय बड़ा हरजाई    ..१ 
राम अरु लछमन  बन बन  भटके संगमे जानकी माई 
कांचन मृगके पीछे दौड़े  सीता हरण  कराई। …संतोभाई। …२ 
सुवर्णमयी  लंका रावणकी  जाको समंदर खाई 
दस मस्तक बीस भुजा कटाई  इज़्ज़त खाक मिलाई , संतोभाई   ,३ 
राजा युधिष्ठिर  द्यूतक्रीड़ामे  हारे अपने भाई  
राज्यासन धन सम्पत्ति  हारे द्रौपदी वस्त्र  हराई  ,,संतोभाई  ..४ 
योगेश्वरने गोपीगणको  भावसे दिनी विदाई 

बावजूद  अर्जुन था रक्षक  बनमे गोपी लुंटाई   ,,,संतोभाई  ५
जलारामकी परीक्षा करने प्रभु आये  वरदाई
साधुजनकी सेवा करने  पत्नी दिनी वीरबाई …संतोभाई ..६ 
आज़ादिके लिए बापूने  अहिंसक लड़त चलाई 
ऐसे बापूके सीने पर हिंसाने  गोली चलाई  …..संतोभाई। .७ 
देशिंगा दरबार नवरंगसे गदा निराश न  जाइ 
समा पलटा जब उस नवरंगका  बस्तीसे भिक मंगाई  …संतोभाई। .८ 
विक्रमके दादाकी  तनखा  माहकी  बारा  रुपाई
विक्रम खुद्की  एक मिनिटकी बढ़कर  बारा रुपाई  …संतोभाई  ..९ 
तान्याकी ग्रेट ग्राण्ड  मधरथी  नामकी झवेर बाई 
 हज़ारो नग़मे  उनकी जुबां पर  कैसे हो हरिफाई  …संतोभाई   १० 
प्रभाशंकर  उमरमे छोटा  था वो मेरा भाई 
कठिन समस्या हल करके  वो  अफ्रीका अमेरिका जाइ   …संतोभाई   ११ 
पानी भरकर बर्तन सरपर  दौड़की  हुई हरी फाई 
जवां लड़कियां पीछे रह गई  भानु पहली आई  ….संतोभाई  ..१२ 
पानीका झगड़ा  पोलिस लाइनमे  होताथा मेरे भाई 
दलपतरामने भानुमतिकी नलसे डॉल हटाई    …..संतोभाई  ..१३ 
रणचंडीबन भानुमतीने अपनी डॉल उठाई 
दलपतरामके  सरमे ठोकी  लहू  लुहान हो जाई  …संतोभाई   ..   १४ 
अब वो भानु चल नहीं सकती   निर्बल होती जाई
अपने हाथो खा नहिसकती   कोई खिलावे तो खाई  ..संतोभाई  ..१५ 
दो हज़ारसात  अगस्तकी जब  दूसरी तारीख आई
इस फानी दुनियाको छोड़के  हांङे लीनी विदाई  ..संतोभाई  ..१६ 
भानुमति जब स्वर्ग गई तब  उदासीनता छाई  
गोरी लड़की आन मिली जब  मायूसी चली जाई  …संतोभाई  ..१७ 
नंगे पाऊँ बकरियां चराई  कॉलेज डिग्री पाई 
  कोलगेटने उसकी कला परखकरनईनई शोध करवाई .. संतोभाई  १ ८ 
  घरमे बैठकर  लिखता पढ़ता  यार्डमे करता सफाई 
सुरेश जानीने  उसकी कलाको  जग मशहूर  बनवाई ..संतोभाई   १९   
—-
सुन्नी सद्दाम हुसैनको  इक दिन समयने गद्दी दिलाई 
कुर्द शिया को मार दिए जब समयने फांसी दिलाई   ….संतोभाई   ..२० 
गोर्धनभाई पोपटने इक दिन सिहंण मार गिराई  
अब गोरधन भाई निर्बल हो गए  मख्खी उड़ाई न जाई .. संतोभाई  ..२१ 
इक गुजरती पटेल सपूतने  श्रीजीसे  माया लगाई 
श्रीजी आके हृदय  बिराजे तब कई  मंदर बन जाई   ..संतोभाई  ..२२ 
भगवान एक्टरने अपनी अलबेला मूवी बनाई 
नाम कमाया दाम कमाया  अंत करुण हो जाइ  ….संतोभाई  ..२३ 
ग्रीस देशके सिकन्दरको  समयने जीत करवाई 
 जब गयाथा  छोड़के दुनिया  खाली हाथो जाई  ..संतोभाई  ..२४ 
काले कर्म तूने बहुत किए थे जब थे बाल काषाई 
अब तुझे सुधर जाना होगा बालने सफेदी दिखाई   …संतोभाई  २५ 
स्टेशन ऊपर नरेंद्र मोदी बेचता था वो चाई 
 समयने उसको साथ दिया तब  वडा प्रधान हो जाई। .संतोभाई  ..२६ 
देख तपस्या  विश्वमित्रकी  इन्द्रको ईर्षा  आई 
इन्द्रने भेजी अप्सरा  मेनका  तपस्या भंग हो जाई। ..संतोभाई। .२७ 
ऋतुमती मेनका  ऋषिको भेटि  ज़ोरसे बाथ भिड़ाई  
मेनका ऋषि विश्व्गामित्रसे टगर्भवति हो जाई  ..संतोभाई  ..२८ 
शकुन्तलाका  जन्म हुवा तब ऋषिको देने आई 
ऋषीने साफ़इन्कार किया तब कण्वमुनिके पास जाइ  …संतोभाई  २९ 
छोटी शकुंतला कण्व मुनिके आश्रममे जब आई 
कामधेनुका दूध पि करके  जल्द जवाँ होजाई  ….संतोभाई   ..३० 
सब कोई सहायक सबल जनके निर्बलके न सहाई  
पवन झगावत अगनजवाला दि९प्क डेट बुझाई   …संतोभाई   ३१ 
अप्सराकी आशासे  बुढा तपस्या करने जाई 
अप्सरा न  आई ठंडी आई  सख्त जुकाम हो जाई। .संतोभाई  ३२ 
जब तक रहो दुनियामे ज़िंदा  काम करो मेरे भाई  
इतना ज़्यादा  काम न करना  काम तुझे खा जाई  ..संतोभाई  .. .३३ 
लिखना पढ़ना काव्य बनाना येतो है चतुराई 
काम  क्रोध मन बश कर  लेना  अति कठिन है  भाई  ..संतोभाई  ३४ 
समदरको मीठा करदेना  कार्य कठिन संतो साईं 
अपने आपको मीठा करनेमे  है अति कठिनाई  ..संतोभाई  ..३५ 
प्रेमका रास्ता अति कठिन है  पूरा न होने पाई 
फंस गया मजनू घोर जंगलमे  फरहाद न परबत लाई .संतोभाई .३६ 
गर्भमे था जब तू माताके  रक्षा करती माई 
बीबी बच्चे पैदा हुवे तब माँ को दिनी विदाई  ….संतोभाई  ..३७ 
भक्ति इक दिन काम आएगी  बात अच्छी बतलाई 
विवश होके मरते देखे  काम न आई भक्ताई  ..संतोभाई। ..३८ 
चड़स शराबकी बुरी आदत है  जल्दीन छूटी जाई 
उसका संग करने वालेको जल्द क़ज़ा ले जाई ..संतोभाई  ३९ क़ज़ा = मोत 
अच्छे काम करो दुनियामे  इच्छो सबकी भलाई 
हो सके उतनी मदद करो तुम  छोडो दिलकी बुराई  ..संतो भाई  ..४० 
निहाँ रख्ख अपने लुत्फ्को बाबा  किसे न कहो  हरषाई 
 हासीदतो जल जाएंगे लेकिन तुझको  देंगे जलाई  ..संतो भाई  ..४१ 
ग़रज़के यारो हो जाते है  ग़रज़ पटे चले जाई  .
सच्चा दोस्त जो होगा अपना  साथ रहेगा सदाई  … संतोभाई  ..४२ 
प्रेमका तंतु अति नाजुक है मत तोड़ो झटकाई 
टूट जाने पर  जुड़ता नही है  जुड़े तो गाँठ  रहजाई  ..संतोभाई  ..४३ 
नंगा भूका सो रहताथा जब थी तुझे ग़रीबाई 
अब वो दिन तेरे पलट गए है   मत करना कँजूसाई  … .   ४४ 
शेरको दंडवत प्रणाम करे  और चूहा डराने जाई
ऐसेभी इन्सान होते है  लोमड़ी जैसे भाई   ,,,संतोभाई  ….४५ 
पतिवृता पहने टूटे वस्तर  वैश्या सुभट सोहाई 
दूध बेचनको घर घर भटके बैठे  मद्य बिकाई। …संतो भाई  ..४६ 
कम्प्युटरमे लिखतथा तीन भाषामे कविता बनाई 
गिर पड़ा सीमेंट कोंक्रीट ऊपर हिपकी(hip )  हड्डी टूट जाई  ..४७ 
बग़ैर मर्जीके यहां  हैयात मुझे ले आई 
न होगी मेरी मर्ज़ी  फिरभी इक दिन क़ज़ा ले जाई। …संतोभाई  ४८ 
पराधीनको सुख नहीं मिलता  याद रख्खो मेरे भाई 
 चन्द्र शंकरके सरपर रहता  पतला होता जाई ,,,संतोभाई ४९ 
चित्ता मुर्दा मनुष्य देहको  आगमे देती जलाई 
चिंता ज़िंदा: जिस्म बशरको धीरेसे देती जलाई  …संतोभाई  ..५० 
दरख़तके रंग बदल जाते है  जबकि पतझड़ आई 
समय आनेपर इन्सानोंके ख्याल बदलते जाई। .. संतोभाई  ..५१ 
प्याज़का था जब बुरा ज़माना  लोग मुफ्त ले जाई
वोही प्याज अब महंगी  हो गई  ग़रीबसे  खाई न जाई  …संतोभाई  ५२
अति पापिष्ट जमारो पारधी  धीवर और कसाई 
दुनिया मांसाहारको छोड़े सब होव सुख दाई  ..संतोभाई  ..५३ 
पापी जनका पाप धोनेको स्वर्गसे गंगा आई 
अब वो गंगा मैली होगई कौन करेगा सफाई  ..संतोभाई  ५४ 
बैठजातिथि आगोशमे मेरे  लब पे लब लगाई 
दाढ़ी मुछकी देख सफेदी  भागी मुंह मचकोड़ाई  ..संतोभाई  ५५ 
बेर बबुलकी झड़ी के बीच सोने वाला आताई
वोही “आताई ” अमरीका आया  देखो कैसी जमाई  ..संतोभाई  ५६  एहि आपके लिए बोनस 
अकबरकी बेटीसे जगन्नाथ प्रेममे गया लिपटाई
शादी होगई गंगातटपे  गंगा लहरी बन जाई   ,,,    श्री
——————-
 “હરજાઈ ” કવિતામાં  વપરાએલા  અઘરા શબ્દોના અર્થ
પ્રથમ  સંસ્કૃત શ્લોકનો ભાવાર્થ  આ શ્લોક  ઘણેભાગે  વાલ્મિકી રામાયણનો છે  .પત્થરો  કોઈ દિવસ પાણીમાં તરે પણ સમય એવો હતો   .રામ રાવણ  યુદ્ધ સમયે કે લંકા માં જવા માટે  સમુદ્ર પાર કરવા પાણા તરવા માંડેલા અને પુલ બંધાઈ ગએલો  .અને મનુષ્યો  રાક્ષસોને  મારી શકે ખરા ?પણ રામ ભલે અવતારી હતા પણ એ માણસ હતા   .અને તેઓએ રાવણ  , કુંભકરણ  , ઇન્દ્રજીત   ,જેવા રાક્ષસોને મારી નાખેલા   .અને વાંદરા  પુલ બાંધતી વખતે  કામે વળગી ગએલા   . એટલેકે સમયની બધી બલિહારી છે  .
કડી #5 બાવજૂદ =હોવા છતાં ,
કડી #8 ગદા = ભિખારી
કડી #9 તનખા= પગાર ,વેતન
કડી # 10  નગ્મા =કવિતા , જુબાંપર = મુખ પાઠ  . મોઢે
કડી #16  માયુસી = ઉદાસીનતા
કડી #23
ધીવર =માછીમાર, મછીયારો
#28 જુકામ = શરદી  કડી
#38 કજા = મૃત્યુ
કડી #40 નિહાં = ગુપ્ત, લુત્ફ =  મજા

કડી #41  આગોશ = ખોળો  લબ= હોઠ
કડી #54 હયાત=જીવન   દરખ્ત = ઝાડ