Daily Archives: ફેબ્રુવારી 3, 2016

खुदाका शुक्र है वरना गुजरती कैसे शाम ; शराब जिसने बनाई है उसको मेरा सलाम

न हरममे न सुकूँ मिलता है बुतखाने में   , चैन  तो मिलता है  साक़ी  तेरे मयखानेमे
में मेरा बनाया हुवा गीत और मेरा  अनुभव लिखता हुँ तो शायद अपने दोस्तोंको लगे के  में अपनी बड़ाई करता हुँ  . दर  असल  मुझमे बड़ाई हैही नही   तो आज में आपको  नाज़ां  सोलपुरीकी बनाई हुई  क़व्वाली  अज़ीज़ नाज़ां  केआवाज़मे  सुननेको मिलती है  वो   में      आपको पढ़नेके लिए पेश करता हुँ  हो सकता है की वो अधूरी भी हो  . तो आप महेरबानी करके दर गुज़र करना   . शुक्रिया   .
आज अंगूरकी बेटीसे मुहब्बत करले  शेख साहबकी नसीयतसे   बग़ावत  करले
इसकी बेटीने उठा रखी है  सरपर दुनिया   , येतो अच्छका हुवा अंगूरको बेटा न हुवा
कमसेकम  दूरसे साकीका नज़ारा करले  आके मयखानेमे जीनेका सहारा करले
आँख मिलतेही जवानिका मज़ा आएगा  पीटो अंगूरके पानीका मज़ा आएगा
मौसम गुल्मी तो पीनेका मज़ा आता है  ,   पिने वालोहिको  जिनका मज़ा  आता है
आ इधर  झुमके  साकीका लेके नाम उठा  , देख वो अब्र उठा  तुभी ज़रा जाम उठा
पिने वाला तुझे  आ जाएगा पीनेका मज़ा  , इसके हर घुँटमे  पोशीदा है जीनेका मज़ा
इसको पीनेसे  तबियतमें  रवानी आए इसको बुढ़ाभी जो पीले तो जवानी आये
इसके हर क़तरेमे नाजाँ निहाँ  दरिया दिली  इसको पीनेसे अदा होती है इक ज़िंदादिली   .