સન્નારીની સ્તુતિ (પ્રશંશા ) ઉર્દુ ભાષામાં

मुसीबतमे  हर इन्सां को  इलाही याद आता है
माशूक़ तू याद आती है  मुझे जब ग़म सताता है  १
निगाहे नाज़  तेरी देख दिल खुरसँद  होता है
पिताहूँ  याद कर तुझको  पानी अक्सीर होता है  ….२
तेरी तिरछी नज़रको देख दिल गुदाज होता है
जैसे आतिषपे रख्खा मोम मुलायम  होही जाता है ,,,,३
परीशां  ज़ुल्फ़क़ी  सायामें  मुझको लुत्फ़  आता है
जब आबे गुलगूँ देती हो सुरूर तब आहि जाता है    ४
तबस्सुम  देख कर तेरा मसर्रत  आहि जाता है
तेरी क़ातिल  अदाएं पर दिल  क़ुर्बान  होता है    ५
तू है इक नाज़नीं औरत तेरा रूप हूरसा  लगता है
“आताई” देख कर  तुझको तसद्दुक  होही जाता है    ६
इलाही = परमेश्वर  ///माशूक़ = प्रेमिका ///गम =  दू :ख  , चिंता
निगाहे नाज़ = चंचल दृष्टी  ///मसरूर =प्रसंन //अक्सीर =रामबाण  सचोट
गुदाज =नरम  , ढीला ///मोम= मी ण // परीशॉ ज़ुल्फ़  =अव्यवस्थित  बाल
आबेगुलगू = लाल रंगका शराब ///सुरूर हल्का नशा///    तबस्सुम = स्मित  ,smile
मसर्रत = प्रसन्न्ता  ///अदा = हाव भाव ///नाज़नीन = कोमलांगी  , अति सुंदर
हूर = अप्सरा ///तसद्दुक = बलिदान आपवा माटे तैयार

4 responses to “સન્નારીની સ્તુતિ (પ્રશંશા ) ઉર્દુ ભાષામાં

  1. pragnaju December 6, 2015 at 8:35 pm

    याद आता है
    अच्छी सूरत पे ग़ज़ब टूट के आना दिल का
    याद आता है हमें हाय! ज़माना दिल का

    तुम भी मुँह चूम लो बेसाख़ता प्यार आ जाए
    मैं सुनाऊँ जो कभी दिल से फ़साना दिल का

    पूरी मेंहदी भी लगानी नहीं आती अब तक
    क्योंकर आया तुझे ग़ैरों से लगाना दिल का

    इन हसीनों का लड़कपन ही रहे या अल्लाह
    होश आता है तो आता है सताना दिल का

    मेरी आग़ोश से क्या ही वो तड़प कर निकले
    उनका जाना था इलाही के ये जाना दिल का

    दे ख़ुदा और जगह सीना-ओ-पहलू के सिवा
    के बुरे वक़्त में होजाए ठिकाना दिल का

    उंगलियाँ तार-ए-गरीबाँ में उलझ जाती हैं
    सख़्त दुश्वार है हाथों से दबाना दिल का

    बेदिली का जो कहा हाल तो फ़रमाते हैं
    कर लिया तूने कहीं और ठिकाना दिल का

    छोड़ कर उसको तेरी बज़्म से क्योंकर जाऊँ
    एक जनाज़े का उठाना है उठाना दिल का

    निगहा-ए-यार ने की ख़ाना ख़राबी ऎसी
    न ठिकाना है जिगर का न ठिकाना दिल का

    बाद मुद्दत के ये ऎ दाग़ समझ में आया
    वही दाना है कहा जिसने न माना दिल का
    +

    आपकी याद आती रही रात भर, चश्म-ए-नम … – YouTube
    Video for youtube याद आता है▶ 4:12

    6 days ago – Uploaded by Rising Rahul
    फि‍ल्‍म: गमन, गीत: मक़दूम मोहि‍उद्दीन, संगीत: जयदेव, स्‍वर: छाया गांगुली…. आप की याद आती रही रात भर चश्म-ए-नम

    • aataawaani December 7, 2015 at 12:54 am

      પ્રિય પ્રજ્ઞા બેન તમે મને આનંદ વિભોર કરી દીધો . મારી આ ગજ્લનો જવાબ શ્રી વિનોદભાઈ પટેલે આપ્યો છે, જે તમને હું મોકલું છું . વિનોદ ભાઈના આ જવાબે મારી ઉમર માંથી 34 વરસ કાઢી નાખ્યાં माषषा अल्लाह

      Ataai ~sacha hai dost hagiz juta ho nahi sakta   jal jaega sona firbhi kaalaa ho nahi sakta                Teachers open door, But you must enter by yourself.

  2. Vinod R. Patel December 6, 2015 at 8:54 pm

    आताजी आपका खूबसूरत नगमा पढ़कर मज़ा आ गया। माशाल्लाह । ऐसे ही लिखते रहिये और अपने दिमागके ख्जानेमेसे निकालकर सबको बांटते रहिये। परवरदिगार आपको ऐसे ही खुश रखे।

    • aataawaani December 7, 2015 at 12:30 am

      अज़ीज़ खलील विनोद भाई में आपका शुक्र गुज़ार हुँ . और आपकी उर्दू को बारहा शाबाशी देता हुँ ये खुश नसीब आता फुला नही समाता Ataai ~sacha hai dost hagiz juta ho nahi sakta   jal jaega sona firbhi kaalaa ho nahi sakta                Teachers open door, But you must enter by yourself.

आपके जैसे दोस्तों मेरा होसला बढ़ाते हो .मै जो कुछ हु, ये आपके जैसे दोस्तोकी बदोलत हु, .......आता अताई

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