Daily Archives: નવેમ્બર 17, 2015

जब रूह बदनसे निकले

या परवर दिगार  जब मुझ पर नज़अका  आलम हो.  मेरा  रूह  जिसमसे
रिहा  होनेकी तैयारी कर रहा  हो. तब इतना करम करना!  क्या करना  ?
 इतना  तो करना  यारब  जब रूह बदनसे  निकले
आला ख़याल हो  दिलमे  जब रूह  बदनसे   निकले   १
आसोंका महीना हो  बरखाकी कमी ना हो
गैरोंकी  ज़मी ना हो जब रूह बदनसे निकले   २
भादरका किनारा हो  समशान विराना हो
नरसिका तराना  जब रूह बदनसे   निकले    ३
मेरी बीबी पासमे हो  बच्चों  भी  साथमे हो
बिछाना  घासमे हो  जब रूह बदनसे निकले    ४
केशंगका सरपे दस्त हो मेरा मन  भजनमे  मस्त हो
सब आस मेरी नस्त हो  जब रूह बदनसे  निकले    ५
“आता ” कि है ये  अर्ज़ी  जो आपका है  क़र्ज़ी
फिर आपकी जो मर्ज़ी  जब रूह बदनसे   निकले   ६