संतोभाई समय बड़ा हरजाई समयसे कौन बड़ा मेरे भाई #2

विक्रमके दादाकी  तनखा  माहकी बारा रुपाई विक्रम खुद्की एक मिनिटकि बढ़ कर  बारा रुपाई  .. संतोभाई। 9 तान्याकी  ग्रेट ग्रान्ड मधरथी  नामकी झवेर बाई हज़ारो नग़मे उनकी  ज़ुबां पर कैसे हो हरिफाई। .santobhaai १० पानी भरकर  बर्तन सरपर दोडकी हुई हरिफाई जवां लड़कियां पीछे रह गई  भानु पहली आई   .santobhaai ११ पोलिस लाइनमे  पानीका झग़डा होताथा मेरे भाई दलपतरामने भानुमतिकी  नलसे डॉल हटाई। .santobhaai १२ रणचंडी बन भानुमतीने अपनी डॉल उठाई दलपतरामके  सरमे ठोकी लहू लुहान  हो जाइ। .santobhaai १३ अब वो भानु चल नहीं सकती निर्बल होती जाइ अपने हाथों  खा  नहीं सकती कोई खिलावेतो खाई संतोभाई  १४ दो हज़ार सात अगस्तकी जब दूसरी तारीख आई इस फानी दुनियाको छोड़के भानुने लीनी विदाई संतोभाई  १५ भानुमति जब स्वर्ग गई तब उदासीनता आई खुदाने  भेजी गोरी लड़की मायूसी चली जाइ  संतोभाई १६ एक गुजराती पटेल सपूतने   श्रीजीसे माया लगाई श्रीजी आके ह्रदय बिराजे तब कई मंदर  बनजाई संतोभाई १७ सुन्नी सद्दाम हुसैनको इक दिन समयने गद्दी दिलाई कुर्द शियाको मार दिए जब समयने  फांसी दिलाई   संतोभाई  १८ प्याज़का था जब बुरा ज़माना  लोक मुफत ले जाइ वोही प्याज़ अब महँगी हो गई गरीबसे खाई न जाइ  संतोभाई  १९ अति पापिष्ट जमारो पारधी  धीवर और कसाई दुनिया मांसाहारको छोड़े  सब होवे सुखदाई  संतोभाई  २० पापीजनका पाप धोनेको स्वर्गसे गंगा आई पृथ्वीलोकमे    मैली हो गई  कौन करेगा सफाई  संतोभाई  २१ देख तपस्या विश्वमित्रकी इंद्रको  ईर्षा आई इन्द्रने भेजी अप्सरा मेनका  तपस्या भंग हो जाइ  संतोभाई २२ ऋतुमती  मेनका ऋषिको भेटि  जोरसे बात भिड़ाई मेनका ऋषि विश्वमित्रसे  गर्भवती हो जाइ   २३ शकुन्तलाका जब जन्म हुवा तब  ऋषिको देने आई ऋषीने साफ़ इंकार किया तब कणाद मुनिके पास जाइ संतोभाई   २४ अप्सराकी आशासे ब्लॉगर माउंट एवरेस्टको जाइ अप्सरा न आई ठंडी आई ज़ोरकी शर्दी हो जाइ  संतोभाई  २५ घरमे बैठके  लिखता  पड़ता  यार्डमे करता  सफाई सुरेश जानीने  उसकी कलाको  मुल्क मशहूर करवाई   संतोभाई  २६ नंगे पैर  बकरियाँ चराई  कॉलेज डिग्री पाई कोलगेटने  उस्की कला परख कर  नई नई शोध कराई  संतोभाई  २७ सबजन सहायक सबल जनोंके निर्बल के न सहाई पवन जगावत अगन ज्वाला दीपक डेट बुझाई   संतोभाई २८ जबतक रहो दुनियामें ज़िंदा  काम करो मेरे भाई इतना ज़्यादा: काम न करना काम तुम्हे खा जाइ   संतोभाई  २९ बेर बबुलकी झाडीके   बीच सोने वाला ” आताई ” वोही आताई अमरीका  आया  देखो कैसी जमाई   संतोभाई   ३०

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8 responses to “संतोभाई समय बड़ा हरजाई समयसे कौन बड़ा मेरे भाई #2

  1. pragnaju ડિસેમ્બર 7, 2014 પર 8:02 એ એમ (am)

    जबतक रहो दुनियामें ज़िंदा काम करो मेरे भाई
    इतना ज़्यादा: काम न करना काम तुम्हे खा जाइ
    वाह्
    याद………………………
    उठाना खुद ही पडता है थका टूटा बदन अपना
    कि जब तक सांस चलती है कोई कंधा नहीं देता
    किसी के ऐब को तू बेनकाब ना कर,
    खुदा हिसाब करेगा तू खुद हिसाब ना कर
    “मेरे बारे मे कोइ राय मत बनाना गालिब.
    मेरा वक्त भी बदलेगा.. तेरी राय भी.”…!!!
    मुझसा ही आलसी मेरा खुदा है !
    ना मै कुछ मांगता हूँ, ना वो कुछ देता है !!

  2. aataawaani ડિસેમ્બર 7, 2014 પર 8:49 એ એમ (am)

    પ્રિય પ્રજ્ઞા બેન
    મેં તમારા સુપુત્ર નો વિડીયો જોયો . જવાબ લખ્યો પણ તમને નો મળ્યો .

  3. Vimala Gohil ડિસેમ્બર 7, 2014 પર 8:17 પી એમ(pm)

    “जबतक रहो दुनियामें ज़िंदा काम करो मेरे भाई
    इतना ज़्यादा: काम न करना काम तुम्हे खा जाइ ”
    आताई आपने बहुत जमादी अमरीका में|

    • aataawaani ડિસેમ્બર 7, 2014 પર 10:19 પી એમ(pm)

      પ્રિય વિમલાબેન ગોહિલ
      તમારી કોમેન્ટ થી હું ઘણો ર્રાજી થયો છું .મારી વાઈફ ભાનુમતિ એ મારા પોત્રો ને આપણા ભારતીય ભોજનનો ચસ્કો લગાડ્યો છે . શાક બની ગયું હોય અને રોટલી બનાવતી હોય એટલે છોકરા રોટલીમાં શાક નાખી રોટલીનું ફીન્ડ્લું વાળી ટાકો બનાવી ઉભા ઉભા ખાવા મંડી જાય એની માં અમેરિકન છે . તમારા જેવા કોકને ઘરે જમવા જવાનું હોય તો હું રમૂજમાં કહું કે બેન તમારાં બાવડાં મજબુત છે ને ? બેન પૂછે દાદા એમ કેમ પૂછો છો ? હું કહું આ દીકરાઓ રોટલી ખુબ ખાવાના છે .

  4. mehboobudesai ડિસેમ્બર 7, 2014 પર 10:00 પી એમ(pm)

    माननीय

    अमेरिका आनेका प्रयोजन कर रहा हूँ. शायद जुलाई अगस्त २०१५ में आना संभव हो .
    आप से मिलाने का अवसर मिलेगा तो अवश्य मिलेंगे

    आभार

    महेबूब देसाई

    • aataawaani ડિસેમ્બર 7, 2014 પર 10:28 પી એમ(pm)

      પ્રિય મહબૂબ ભાઈ મેં આપને ઈમેલ લખ્યો છે એમાં લખ્યું છેકે મારા ઘરનાં અને મારા હૃદયનાં બારણાં આપના માટે ખુલ્લાં રાખ્યાં છે . આપ મારે ઘરે પધારી મને આભારી કરશો .

  5. રીતેશ મોકાસણા ડિસેમ્બર 8, 2014 પર 2:37 એ એમ (am)

    એક નિખાલસ કબુલાત : બ્લોગની દુનિયામાં મને લાવનાર સુરેશ જાની સાહેબ, એમને મને કહેલું કે એક 92 વર્ષનો યુવાન ડોસલો બ્લોગ ચાલવી શકે તો હું કેમ નહિ ? આતા, હું તો તમારા પુત્ર સમાન છું તમારામાંથી પ્રેરણા મને મળેજ છે.તમારો આભાર ને સાથો સાથ પ્રણામ !

आपके जैसे दोस्तों मेरा होसला बढ़ाते हो .मै जो कुछ हु, ये आपके जैसे दोस्तोकी बदोलत हु, .......आता अताई

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