संतोभाई समय बड़ा हरजाई (हरजाई =आवारा ,विश्वासपात्र नहीं ,कहींसे कहीं रखदे

मेरे प्यारे ब्लोगर बहनो और भाइओ और अन्य वाचक वर्ग  आज में आपकी समक्ष एक नगमा  पेश करता हुँ उसके पहले मैं संस्कृत और दोहा पेश करूँगा
प्लवन्ते पस्तरा निरे  मनवा घ्ननंती राक्षसान्
कपय: कर्म कुर्वन्ति  कालस्य कुटिला गति :
दोहरा   ।सम्य समय  बलवान है नहीं पुरुष बलवान
काबे लुंटी गोपिका  एहि अर्जुन एहि  बान
ये गीत  भक्त  कवि  सुरदासका  भजन  ” नाथ कैसे गजको बंध छुड़ाओ  “इस ढंग से और महाभारत मूवीमे  उत्तरा नृत्य करते हुवे गाती है  इस ढंगसे भी  गया जा सकता है  .
संतोभाई समय बड़ा हरजाई  समयसे कौन बड़ा मेरे भाई
संतोभाई समय बड़ा हरजाई   ,,, १
राम अरु लछमन बन बन भटके संगमे जानकी माई
कंचन मृगके  पीछे दौड़े  सीता हरन कराई   ,। संतोभाई   ।२
सुवर्णमयी लंका रावणकी  जाको समंदर खाई
दस मस्तक  बीस भुजा कटाई  ईज्जत खाक मिलाई। ।सन्तोभाइ। ३
राजा युधिष्ठिर  द्यूतक्रीडामे  हारे अपने भाई
राज्यासन  धन सम्पति हारे  द्रोपदी वस्त्र हराई। . संतोभाई   ४
योगेश्वरने गोपीगणको  भावसे दिनी  विदाई
बावजूद अर्जुन था रक्षक  बनमे गोपी लुंटाई  . संतोभाई   ।५
जलरामकी परीक्षा  करने पर्भु आये वरदाई
साधुजन की सेवा करने पत्नी दिनी वीरबाई। ।सन्तोभाइ  ६
आज़ादिके लिए बापूने अहिसक लड़त  चलाई
ऐसे बापूके सिने पर  हिंसाने गोली चलाई  …सन्तोभाइ   ।७
देशिंगा दरबार नवरंगसे  गदा निराश न जाइ
समा पलटा जब उस नवरंगका  बस्तीसे भिक मंगाई   संतोभाई। .8

आपके जैसे दोस्तों मेरा होसला बढ़ाते हो .मै जो कुछ हु, ये आपके जैसे दोस्तोकी बदोलत हु, .......आता अताई

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