जो दू:खमें काम आवे वही सच्चा दोस्त है .

मेरे अज़ीज़ अहबाब कई साल पहले मुझे इक उर्दू बुक पढ़नेको मिली उसमे इक किस्सा था जो में आपकी खिदमतमे पेश करना चाहता हुँ , दरअसल तो ये मेरी अपनी प्रेक्टिश के लिए है .
किसी जंगलमे खरगोश ,लोमड़ी ,चूहा ,और कौवा. साथ साथ रहते थे ,एक दिन कोई शिकारी कुत्ता खरगोशके पीछे हो लिया ख़र्गोश दौड़ता हुवा पहले चूहेके पास आया ,कुत्तेको देख चूहा बिलमे घुस गया था ख़र्गोसने उसे अपनी मददके लिए ज़ोरसे पुकारा ,बिलसे मुंह निकाल कर चूहेने कहा अरे भाई मुझेतो अपनीही जानका डर है ,तेरी मदद करुँ तो कैसे करुँ ”
बेचारा खरगोश तेजीके साथ आगे बढ़ा और लोमडीको झाड़िमे घुसते देखा ,खरगोशने उसे भी अपनी जान बचानेके लिए पुकारा ,लोमडिने जवाब दिया ,प्यारे भाई !मेरे पाऊंमें दर्द होरहा है , किसी और दोस्तके पास जाओ ,”
पेड़ पर बैठा हुवा कौवा यह सब हाल देख रहा था ,अपने दोस्तको दू :खी देख उससे न रहा गया ,उसने झटसे कुत्तेके सर पर चोंच मारना शुरू किया थोडीही देरमें कुत्तेके सरसे
खून बहने लगा ,आखिर तंग आकर कुत्तेने खरगोशका पीछा छोड़ दिया .
ठीक ही कहा है — दू :खमें जो काम आवे वहि सच्चा दोस्त है .

2 responses to “जो दू:खमें काम आवे वही सच्चा दोस्त है .

  1. pragnaju November 2, 2014 at 2:36 pm

    एक सच्चा दोस्त वही है आपका जो .
    पहला आंसू अपने हाथ से पोंछ ले……
    दूसरा आंसू अपने हाथ में रोक ले…..
    और
    अगर तीसरा आंसू आये तो……
    जोर से थप्पड़ मारे …और कहे….
    .
    “ले .. तू खुल कर रो ही ले…….”

    • aataawaani November 3, 2014 at 9:06 pm

      પ્રિય પ્રજ્ઞા બેન
      તમે મિત્રના પ્રકાર બરાબર કહ્યા
      મિત્ર તો એવો હોય
      મિત્રતો એવો હોય જેવો કુવા ઉપર કોસ
      પછાડ્યો પાણી દ્યે રદે ન આણે રોષ આ આતાને અનેક પ્રકારના મિત્ર છે .હું બધાથી મળીને રહું છું .પણ સન્મિત્રને મારા હૃદયમાં સ્થાન આપું છું .
      साजिद है आताई दोस्तोंका बुरे दोस्तोने खुद ताल्लुक छोड़ रख्खा है
      जबसे खुदाको मैंने दिलमे बसा रख्खा है
      तबसे हर शख्सको मैं अपना बना रख्खा है

आपके जैसे दोस्तों मेरा होसला बढ़ाते हो .मै जो कुछ हु, ये आपके जैसे दोस्तोकी बदोलत हु, .......आता अताई

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