Daily Archives: ઓગસ્ટ 27, 2013

ભાનુ મતીની છઠ્ઠી પુણ્ય તિથી

img058दो हजार सात अगस्त्की जब दूसरी तारीख आई इस फानी दुनिया को छोडके भानुने लीनी विदाई। …।सन्तो भाई समय बड़ा हरजाई

ब्मेरी खातिर ख्वाह खानम की एक गजल लिखने जारहा हूँ इस गजलका  मायना बताता हु। तेरी है जिद्दी आदत फिर तुझपर दिल फ़िदा होता  अगर तुझमे न जिद्द होती  खुद जाने तो क्या होता १ ///// में उसको मेरे साथ लेके  समंदरकी सफ़र करने जाने वाला था  उसने ना बोल के मुझे  इतना खर्च करके  समुद्र की  सफ़र करने नहीं जाना  मैंने और मेरे बेटेने  बहुत समझाया   मगर वो अपनी   जिद्द्पे कायम रही। उस वक्त मैंने  एक शेर बनाया ////लोग कहते है की ओरत् को  सैम जाना मुहाल है  लेकिन स.च तो यह है  समझाना मुहाल है. मुहाल= अशक्य

तेरी है जिद्दी आदत फिर   तुझ पर दिल फ़िदा होता ///अगर  तुझ में न जिद्द होती  खुदा जाने तो क्या होता ////  फिर वो थोड़े महीने के लिए  कमज़ोर हो गई थी फिरभी वो बहुत म्हणत करती थी //// तू है कम जोर   फिरभी काम मर्दानासा कराती है   तू जोरावर अगर होतीतो परबत टूटने लगता ////एक दिन में  प्लेंमे सफ़र करता था भानु मति मेरी साथ थी  अचानक में बे होश होक गिर गया /////में जब हो गया बे होश हवाई जहाजके अन्दर  क़ज़ा ले जाती गर मुझको  प्रभु रक्षक तेरा होता

तू रंजूर होती थी तो  मेरा दिल धड़कता था   मोट  गर आजाती तुझको  तो मेरा हाल क्या होता //////      क्या होना था  एक साल उदास रहा फिर जैसा पहले था वैसा हो गया                समझ में ये नहीं आता “आता ” क्यों मोज्मे रहता  //// वोही होता है जोमन  जुरे खुदा होता

भानुमती जब उक्बा(परलोक ) गई एक साल तक मेरी मायू सी  रही  जब में समुंदरी सफरमे गया  वहा  मेरी मायूसी दूर करनेको खुदाने एक लड़की भेजी  जिस हने लगी लड़की के उपर मुझे मेरी पोती के बराबर उल्फत हो गई वैसे  वो लड़की भी मुझे अपने  दादा की  माफक   चाहने लगी और मेरी मायूसी दूर होगई  वो गोरी मुझे अभीतक चाहती है  तद्दन नि :स्वार्थ  प्रेम करती है कोई लालच नहीं है  एक दिन उसने मेरे दोस्त  Chris को मेरे बारेमे पूछा की  अताइका क्या हाल है  Chrisने कहा बागमे खोदकाम करता हे  लिखता हे पढता हे और माला बनाता  हे जाद्के बिज की  ९२ बरसका हे मगर ८ ५  उम रका हो ऐसा दीखता है  मुझे तो वो ७० बरसका ला भेजे ये माला में ऐसा वो लड़की बोली और कहाकि अताइको बोलो मेरे लिए एक ला भेजे  में उस मालाको मेरे कीमती ज़ेवर की स न्दुक  में रख्खुं गी  और में जब उनकी उमर्की हगी  और मुझे आलस स ताय्गा तो में उस माला से प्रेरणा लुंगी    सब दोस्तोको राम  जुहार सलाम