शायर नियाजकी सूफी गज़ल

यारको हमने जा  ब  जा  देखा

कहीं ज़ाहिर  कहीं छुपा  देखा

यारको हमने जा ब  जा  देखा ….1

कहीं मुमकिन हुवा कहीं  वाजिब

कहीं फानी  कहीं बका  देखा …..यारको 2

कहीं वो बादशाहे तख़्त नशीं

कहीं कासा  लिए  गदा  देखा …..यारको 3

कहीं वो दरलिबासे  माशुकन

बरसरे नाज़ और  अदा देखा ….यारको 4

कहीं आशिक “नियाज़ “कि सूरत

सीना बरिया और  दिलजला देखा ….यारको 5

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2 responses to “शायर नियाजकी सूफी गज़ल

  1. Vinod R. Patel સપ્ટેમ્બર 23, 2012 પર 11:00 એ એમ (am)

    आपके जैसे दोस्तों मेरा होसला बढ़ाते हो

    આતાજી, આપ જો હમારા હોસલા બઢાતે હો, યહ ભી તો બેમિશાલ હૈ .

    આપકે આગે તો હમ છોટે લડકે હૈ !

आपके जैसे दोस्तों मेरा होसला बढ़ाते हो .मै जो कुछ हु, ये आपके जैसे दोस्तोकी बदोलत हु, .......आता अताई

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