Daily Archives: ઓગસ્ટ 11, 2012

कवि लोक की कल्पनाए

कवि लोक आदि  अनादिसे   पद्य और गद्य में अपनी ओरसे मिलावट करते आए है इसका बड़ा दृष्टांत  रामायण और उसके कर्ता   ऋषि वाल्मीकि है . वाल्मीकि ऋषि ने   स्वयम कहा है की  पारधि ने जब   सारस जोड़ीमेसे   एक को   मार गिराया .जो जिन्दा  रहाथा  उसका कल्पान्त  देख के मुझे रामायण  बनानेकी इच्छा  हुई

मै  आपको  एक  कवि की कल्पना क़ा  छंद  पढने के लिए  लिखता हु   उसके पहले  आपको इसका मतलब लिखता  हु  की  एक दिन  मंदर में पुजारी  शंकरको   भस्म  लगाता था  आप जानते हो की  शंकरके गलेमे  नाग    लिपटा  हुवा  रहता है . अचानक  थोड़ी सी भस्म  नाग की आँख में गिरी और  नाग बेताब  हो गया और फुंफकार   करने  लगा ,शंकर के सरपे  चन्द्र रहता है  और चन्द्र  कविओकी   कल्पना  के अनुसार  अम्रुतसे भरा हुवा रहता  है .नागकी  फुफकार सुनके  चन्द्र   घबराया  और  अमृत  टपक पड़ा    कविओकी    कल्पना के अनुसार  अमृत  मृत   शरीर  को जिन्दा करता है . शंकरका  आसन बाघ के   चमड़े का होता है .जब अमृत  बाघके चमड़े पर गिरा तो बाघ  जिन्दा होगया ,और मंदरमें  में  भागम भाग हो गई  .बाघ जगदम्बा का  वाहन  है ,और माता  पार्वती  अम्बा है .शंकरका   वाहन

बेल है . बाघको देख के  बेल   दोड के भाग चला अपना पूंछ ऊँचा  करते हुवे , यह दृश्य  देख  कर माता  प[र्वती   शंकर न देखे   ऐसे मुंह  टेडा करके हस गई .और मनमे सोचा की  मेरे  वाहन  से मेरे पतिका  वाहन  डर के  मारे  भाग निकला  तो अब आप  छंद   पढ़ो .

भस्म  रमावत  शंकरको  अहि लोचन बिच  परी  जरिके

अहिकी  फुफकार  शाशिको  लगी तब  अमृत  बिंदु  पर्यों  धर पे

ताहिको छाई  बाघम्बर जागत हाहा कार मच्यो शिव मन्दर्मे

देखि सुरभि सुत भाग चल्यो  तब गोरि हँसी मुख यू करके         आत़ा