मय खानेकी सेर

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3 responses to “मय खानेकी सेर

  1. pragnaju જૂન 5, 2012 પર 2:25 પી એમ(pm)

    कहे अत्ता मस्ताना, उसने हक़ दिल में पहचाना.

    वही मस्तों का मयखाना, उसी के बीच आता जा.

  2. Atul Jani (Agantuk) જૂન 6, 2012 પર 4:47 એ એમ (am)

    एक दिन गुज़रे जो हम, मकदे के मोड़ से
    एक मकश ज़रा त, मय से रिश्ता जोड़ के (?)
    हमने पूछा किसी लिया तू, उमर भर बीता रहा \- २
    कुछ ना बोला, कुछ ना बोला, कुछ ना बोला अपनी धुन में
    बस यही गाता रहा
    मुहब्बत है क्या चीज़ …

    http://lyricsindia.net/songs/show/563

    • aataawaani ઓગસ્ટ 1, 2012 પર 5:23 પી એમ(pm)

      अतुल जनि आपने बहुत अच्छी ग़ज़ल भेजी   आभार एक मय कशने मयखानेमे दम तोडा . गुसल के  वास्ते शराबे तहूर ला. इत्तर कपूर के बदले  खाके चमन ला . रेशम कफनके बदले  अंगूर के पत्तोका  कफ़न ला .

        Ataai ~sacha hai dost hagiz juta ho nahi sakta   jal jaega sona firbhi kaalaa ho nahi sakta                Teachers open door, But you must enter by yourself.

      ________________________________

आपके जैसे दोस्तों मेरा होसला बढ़ाते हो .मै जो कुछ हु, ये आपके जैसे दोस्तोकी बदोलत हु, .......आता अताई

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