સમય બડા હરજાઇ

प्लवन्ते पास्तारा निरे मानव घ्नानान्ति राक्सासन

कपय: कर्म कुर्वन्ति कालस्य  कुटिला गति: મતલબકે  સમય ની ગતિ બહુ વિચિત્ર હોય છે  પાણા કોઈદી પાણીમાં  તરે પણ સમય એવો હતો .રામને લંકામાં જવું હતું ત્યારે પાણા પાણી ઉપર તર્યા અને  પૂલ બનીગયો . અને માણસો  કોઈદી રાક્ષાસને  મારી શકે ?અને એપણ     રામના સમયમાં શક્ય બન્યું .અને વાંદરા  કોઈદી કામ કરે  અને એપણ  રામના સમયમાં વાંદરાઓએ પુલ બાંધી આપ્યો. એટલેકે સમયની ગતિ બહુ વિચિત્ર હોય છે .समय समय बलवान है नहीं पुरुष बलवान

काबे लुंटी गोपिका  येही अर्जुन येही बान   અર્જુન એજ હતો એનું ગાંડીવ ધનુષ એનું એજ હતું .કે જેને લીધે મહાભારતના યુધ્ધમાં હા હા કાર મચી ગએલો.. પણ સમય એ નહતો .એટલેજ સામાન્ય  લુંટારાઓએ   અર્જુનના રક્ષાણ નીચે રહેલી ગોપીઓને લુંટી લીધી .

હું એક ગીત આપની સમક્ષ રજુ કરું છું’ જેમાં સમયે કેવી હલ ચલ  મચાવી દીધી.  એ વાત આવશે .આ ભજન અનેક ઢબથી ગઈ શકાશે .જેનો રાગ ભૈરવી દીપચંદી છે. भक्त कवी सुरदासका भजन }  नाथ कैसे गजको बांध छुडायो . इसी  ढंग
राम अरु लछमन बन बन भटके संगमे जानकी माई
कंचन मृगके पीछे दोड़े सीता हरण कराइ ———–संतोभाई १
सुवर्ण मई लंका रावनकी जाको समंदरहारे अपने भाई  खाई
दस मस्तक बीस भुजा कटाई इज्ज़त ख़ाक मिलाई   —-संतोभाई २
राजा युध्धिष्ठिर द्युत  क्रिदामे  हारे अपने भाई
राज्यासन धन सम्पति हारे द्रोपदी वस्त्र हराई————संतो भाई ३
योगेश्वरने  गोपिगन को भावसे दिनी विदाई
बावजूद अर्जुन था रक्षक बनमे गोपी लुन्टाई ————संतोभाई ४
जलारामकी परीक्षा करने प्रभु आये वरदाई
साधू जानकी  सेवा करने पत्नी दिनी वीरबाई ———–संतोभाई ५
आजादिके लिए बापूने अहिंसक लड़त चलाई
ऐसे बापुके सीने पर हिन्साने  गोली चलाई ———-संतोभाई ६
देशिंगा दरबार नोरंगसे गदा निराश नाजाई
समा पलटा जब उस नोवरंगका बस्तीसे भिक मंगाई –संतोभाई ७
पानी भरकर बरतन सरपर दोड्की हुई हरिफाई
जवां लड़कियाँ पीछे रहगई भानु पहली आई ———-संतोभाई ८
अब वो भानु चल नहीं सकती निर्बल होती जाई
अपने हाथो खा नहीं सकती कोई खिलावेतो खाई —–संतो भाई ९
दो हज़ार साल अगस्त्की जब दूसरी तारीख आई
इस फानी दुनियाको छोडके भानुने लीनी विदाई ——-संतोभाई १०
विक्रमके दादाकी तनखा माहकी बारा रुपाई
विक्रम खुदकी एक मिनिटकी बढ़कर बारा रुपाई —–संतोभाई ११
नंगेपेर बकरियां चराई कोलेज  डिग्री पाई
कोलगेटने बड़ा बॉस बनाके नई नई शोध करवाई —–संतोभाई १२
एक गुजराती सपुतने श्रीजीसे माया लगाईं
श्रीजी आकेबिराजे  ह्रदयमें मंदिर कई बन जाई ——-संतोभाई १३
गोर्धनभाई पोपटने सिंहको मार गिराई
अब गोर्धनभाई निर्बल होगए मख्खी न मारी जाई —–संतोभाई १४
प्याज्का जब बुरा ज़माना लोक मुफ्त ले जाई
वोही  प्याज अब महँगी होगई गरिबसे खाई न जाई —-संतोभाई १५
घरमे बैठ लिखता पढ़ता यार्दमें करता सफाई
सुरेशाजानिने  कला परखकर जग मशहूर कराई ——=संतोभाई १६
हिल मिल कर रहो जगतमे इच्छो सबकी भलाई
मोततो एक दिन आने वाला क्यों रहो सुखदाई ———-संतोभाई १७
बेर बबुल्की जाड़ीके बिच सोनेवाला अताई
वोही अताई अमरीका आया देखो कैसी जमाई ———संतो भाई १८

10 responses to “સમય બડા હરજાઇ

  1. pragnaju December 18, 2011 at 12:55 pm

    अच्छा आत्मनिवेदन की बहुत अच्छी काव्यात्मक अभिव्यक्ती

    प्याज्का जब बुरा ज़माना लोक मुफ्त ले जाई
    वोही प्याज अब महँगी होगई गरिबसे खाई न जाई —-संतोभाई १५

    प्याज के दाम १00 रुपये प्रति क्विंटल और एक महीने में 300 रुपये प्रति क्विंटल गिर चुके हैं। आगे भी प्याज की कीमतों में तेजी की उम्मीद नहीं है।
    प्याज के वर्तमान भाव से किसानों की हालत खराब है। इससे भाव और नीचे जाने पर किसानों की लागत निकलना भी मुश्किल हो जाएगा।

    बेर बबुल्की जाड़ीके बिच सोनेवाला अताई
    वोही अताई अमरीका आया देखो कैसी जमाई ———संतो भाई १८

    फिनिक्ष को सत्य की आग में जलना पडता है…

    तब नव सर्जन नव निर्माण होता है…

    • aataawaani December 18, 2011 at 7:58 pm

      thank you dost

      Ataai ~sacha hai dost hagiz juta ho nahi sakta   jal jaega sona firbhi kaalaa ho nahi sakta Teachers open door, But you must enter by yourself.

      ________________________________

  2. સુરેશ જાની December 18, 2011 at 2:15 pm

    आता , अभी तो शुरुआत है, और आप ईतने निखरने लगे , तो आगे क्या होगा? आसमान नीचे ऊतर आयगा क्या? !

    घरमे बैठ लिखता पढ़ता यार्दमें करता सफाई
    सुरेशाजानिने कला परखकर जग मशहूर कराई
    ————–
    जानी तो होवत कुछ नाहीं , निमित्त होय सब भाई
    सूरज चमके खुदके नूरसे, पूरब दिशा कछु नांही ॥
    ————
    जानीने तो आताको दिशा बताई, अब आता चमकते चले, चमकते चले…
    खूब आगे बढो आता – शतक आपका ईन्तज़ार कर रहा है ।

    • aataawaani December 18, 2011 at 7:37 pm

      जानी साहब मैं आपका शुक्र गुज़ार हूँ आता  Ataai ~sacha hai dost hagiz juta ho nahi sakta   jal jaega sona firbhi kaalaa ho nahi sakta Teachers open door, But you must enter by yourself.

      ________________________________

  3. પરાર્થે સમર્પણ December 19, 2011 at 12:01 am

    प्यारे अताई आपा,

    हिम्त्लालने हिमत दिखाई तो जानीने जोश भरा

    अताइके कदम ज़ुमके बढे तो आतावानी हे हराभरा

    • aataawaani December 19, 2011 at 4:04 pm

      shsahbash Ataai ~sacha hai dost hagiz juta ho nahi sakta   jal jaega sona firbhi kaalaa ho nahi sakta Teachers open door, But you must enter by yourself.

      ________________________________

  4. rahiajnabi December 20, 2011 at 5:00 pm

    AATAI YOU ARE TRUE *LEGEND “YOU PROVE THAT AGE IS JUST STATE OF MIND ‘
    JUST NUMBER,
    A TALENTED AND DEDICATED-SELF LEARNT ARTIST-WITHOUT ANY FORMAL TRAINING-I TAKE MY HAT OFF FOR YOU..SIR!!***
    rahiajnabi

    • aataawaani January 2, 2012 at 6:11 pm

      THANKYOU   KHAIL HITESH    ATAAI

        Ataai ~sacha hai dost hagiz juta ho nahi sakta   jal jaega sona firbhi kaalaa ho nahi sakta Teachers open door, But you must enter by yourself.

      ________________________________

  5. અશોક મોઢવાડીયા December 21, 2011 at 12:11 am

    बेर बबुल्की जाड़ीके बिच सोनेवाला अताई
    वोही अताई अमरीका आया देखो कैसी जमाई — અને અહીં બ્લોગજગતમાં પણ આતાની વાણીએ देखो कैसी जमाई !
    બે-તણ દિ બાર રયો પણ આજ ભેગુંથી વટક વાળે લાં. મૌજ આવી.

    • aataawaani December 21, 2011 at 3:57 am

      thankyou ashok modhvadiya aataa Ataai ~sacha hai dost hagiz juta ho nahi sakta   jal jaega sona firbhi kaalaa ho nahi sakta Teachers open door, But you must enter by yourself.

      ________________________________

आपके जैसे दोस्तों मेरा होसला बढ़ाते हो .मै जो कुछ हु, ये आपके जैसे दोस्तोकी बदोलत हु, .......आता अताई

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: